श्लोक 24.1
जदपि कही कपि अति हित बानी। भगति बिबेक बिरति नय सानी॥
बोला बिहसि महा अभिमानी। मिला हमहि कपि गुर बड़ ग्यानी॥ १ ॥
jadapi kahī kapi ati hita bānī bhagati bibeka birati naya sānī
bolā bihasi mahā abhimānī milā hamahi kapi gura baṛa gyānī
हिंदी अर्थ
यद्यपि कपि ने भक्ति, विवेक, वैराग्य और नीति से भरी अत्यंत हितकारी बात कही, फिर भी वह महा अभिमानी हँसकर बोला, "हमें यह बंदर बड़ा ज्ञानी गुरु मिला है!
श्लोक 24.2
मृत्यु निकट आई खल तोही। लागेसि अधम सिखावन मोही॥
उलटा होइहि कह हनुमाना। मतिभ्रम तोर प्रगट मैं जाना॥ २ ॥
mṛityu nikaṭa āī khala tohī lāgesi adhama sikhāvana mohī
ulaṭā hoihi kaha hanumānā matibhrama tora pragaṭa maiṁ jānā
हिंदी अर्थ
"अरे दुष्ट! तेरी मृत्यु पास आ गई है, तभी तो अधम होकर मुझे सीख देने लगा है।" हनुमान जी बोले, "उलटा ही होगा (मृत्यु तुम्हारी पास है)। मैंने तुम्हारा मति-भ्रम प्रत्यक्ष जान लिया।"
श्लोक 24.3
सुनि कपि बचन बहुत खिसिआना। बेगि न हरहु मूढ़ कर प्राना॥
सुनत निसाचर मारन धाए। सचिवन्ह सहित बिभीषनु आए॥ ३ ॥
suni kapi bachana bahuta khisiānā begi na harahu mūṛha kara prānā
sunata nisāchara mārana dhāe sachivanha sahita bibhīṣhanu āe
हिंदी अर्थ
कपि की बात सुनकर वह बहुत क्रोधित हुआ और बोला, "इस मूर्ख के प्राण जल्दी क्यों नहीं हर लेते?" सुनते ही राक्षस मारने दौड़े, तभी मंत्रियों के साथ विभीषण आ पहुँचे।
श्लोक 24.4
नाइ सीस करि बिनय बहूता। नीति बिरोध न मारिअ दूता॥
आन दंड कछु करिअ गोसाँई। सबहीं कहा मंत्र भल भाई॥ ४ ॥
nāi sīsa kari binaya bahūtā nīti birodha na māria dūtā
āna daṁḍa kachhu karia gosām̐ī sabahīṁ kahā maṁtra bhala bhāī
हिंदी अर्थ
सिर नवाकर और बहुत विनती करके उन्होंने कहा, "दूत को मारना नीति के विरुद्ध है। हे स्वामी! कोई और दंड दीजिए।" सबने कहा, "भाई! यह सलाह अच्छी है।"
भावार्थ
दूत को न मारना भारतीय राजनीति का पुराना नियम था। विभीषण दया की नहीं, इसी नियम की दुहाई देकर हनुमान जी को बचाते हैं, क्योंकि दया से रावण नहीं पिघलता।
श्लोक 24.5
सुनत बिहसि बोला दसकंधर। अंग भंग करि पठइअ बंदर॥ ५ ॥
sunata bihasi bolā dasakaṁdhara aṁga bhaṁga kari paṭhaia baṁdara
हिंदी अर्थ
यह सुनकर दशकंधर हँसकर बोला, "अच्छा, तो बंदर का कोई अंग भंग करके उसे भेज दो।"
श्लोक 24.6
कपि कें ममता पूँछ पर सबहि कहउँ समुझाइ।
तेल बोरि पट बाँधि पुनि पावक देहु लगाइ॥ २४ ॥
kapi keṁ mamatā pūm̐chha para sabahi kahaum̐ samujhāi
tela bori paṭa bām̐dhi puni pāvaka dehu lagāi
हिंदी अर्थ
"मैं सबको समझाकर कहता हूँ, बंदर की ममता पूँछ पर होती है। तेल में कपड़ा डुबोकर पूँछ पर बाँधो और फिर आग लगा दो।"