Bhakti Arohan
ॐ

राहु कालनए आरंभ से बचने का दैनिक समय

राहु काल हर दिन का लगभग डेढ़ घंटे का वह भाग है जो छाया ग्रह राहु को सौंपा गया है, और जिसमें परंपरा से नए कार्य आरंभ नहीं किए जाते। दिन में इसका स्थान वार पर निर्भर करता है — सोमवार को सुबह जल्दी, रविवार को दोपहर बाद — और घड़ी का सटीक समय आपके शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त पर।

आज का पंचांग

नई दिल्ली, भारत

दिनांक12 अक्टूबर 2026

वारसोमवार

हिंदू वर्षविक्रम संवत् 2083

हिंदू माहआश्विन

सूर्योदय6:20 am

सूर्यास्त5:54 pm

तिथिशुक्ल पक्ष द्वितीया (10:13 pm तक)

नक्षत्रस्वाति (11:52 pm तक)

योगविष्कम्भ (8:31 pm तक)

करणबालव (9:48 am तक)

अभिजीत मुहूर्त11:44 am – 12:30 pm

राहु काल7:46 am – 9:13 am

समय IST में, चुने गए शहर के सूर्योदय से गणना। तिथि, नक्षत्र, योग और करण सूर्योदय के समय के हैं, साथ में उनके समाप्त होने का समय।

राहु काल की गणना

दिन का समय — सूर्योदय से सूर्यास्त तक — आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। हर वार इन आठ में से एक भाग राहु का होता है। दिन का पहला भाग कभी राहु काल नहीं होता; बाक़ी सात भाग सात वारों में बँटे हैं:

वारदिन का भागसूर्योदय सुबह 6:00 और सूर्यास्त शाम 6:00 हो तो समय
सोमवारदूसरासुबह 7:30 – 9:00
शनिवारतीसरासुबह 9:00 – 10:30
शुक्रवारचौथासुबह 10:30 – दोपहर 12:00
बुधवारपाँचवाँदोपहर 12:00 – 1:30
गुरुवारछठादोपहर 1:30 – 3:00
मंगलवारसातवाँदोपहर 3:00 – 4:30
रविवारआठवाँशाम 4:30 – 6:00

क्रम याद रखने का एक सरल तरीक़ा: सोमवार से आगे — सोम, शनि, शुक्र, बुध, गुरु, मंगल, रवि।

6 से 6 वाला समय केवल उदाहरण है। दिसंबर में दिल्ली में सूर्योदय लगभग 7:10 और सूर्यास्त लगभग 5:30 होता है, तब हर भाग लगभग 77 मिनट का होता है और हर राहु काल उसी अनुसार खिसक जाता है। सदा अपने स्थान का सूर्योदय-सूर्यास्त, या अपने शहर का पंचांग देखें।

राहु ही क्यों, और इसका महत्व

राहु चंद्रमा का उत्तरी पात है — वह बिंदु जहाँ चंद्रमा का मार्ग सूर्य के मार्ग को काटता है, और इसीलिए जहाँ ग्रहण होते हैं। समुद्र मंथन की पौराणिक कथा में असुर स्वर्भानु देवताओं की पंक्ति में बैठकर अमृत पी गया; सूर्य और चंद्रमा ने उसे पहचान लिया, भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उसका सिर काट दिया, और वह अमर सिर राहु बना, जो तब से ग्रहण में सूर्य और चंद्रमा को ग्रसता है। इसलिए राहु आवरण, भ्रम और अचानक उलटफेर का प्रतीक है — किसी नए काम की शुरुआत में जो कोई नहीं चाहता।

इसका पालन दक्षिण भारत में सबसे अधिक होता है, जहाँ हर कैलेंडर में राहु काल छपा रहता है और बहुत-से लोग इस समय यात्रा, अनुबंध या कोई महत्वपूर्ण काम आरंभ नहीं करते।

क्या टालें, क्या ठीक है

  • आरंभ न करें: यात्रा, व्यापार, संपत्ति या वाहन की ख़रीद, साक्षात्कार, अनुबंध, या गृह प्रवेश व सगाई जैसा कोई संस्कार।
  • प्रभावित नहीं: पहले से चल रहा काम। राहु काल आरंभ के बारे में है; इसके शुरू होते ही काम या यात्रा रोकने की आवश्यकता नहीं।
  • नियमित पूजा ठीक है। बल्कि तमिलनाडु और कर्नाटक में राहु काल दुर्गा पूजा — विशेषकर मंगलवार और शुक्रवार को राहु काल में दुर्गा जी के सामने दीप जलाना — एक प्रिय परंपरा है, इस भाव से कि देवी राहु पर विजय पाती हैं।

संबंधित दैनिक काल

दक्षिण भारतीय पंचांग यमगंड और गुलिक काल भी देते हैं — दिन के आठ भागों से इसी तरह निकाले जाने वाले दो और दैनिक काल। यमगंड को राहु काल की तरह अशुभ माना जाता है। गुलिक (मांदि, "शनि का पुत्र") अनोखा है: इसमें आरंभ किया गया काम दोहराया जाता है, ऐसा माना जाता है, इसलिए जो आप दोबारा नहीं चाहते उसके लिए इसे टाला जाता है — पर कुछ लोग संपत्ति ख़रीदने के लिए इसे चुनते हैं।

संतुलन बनाए रखें

राहु काल दिन का एक छोटा भाग है, पूरे दिन पर कोई शाप नहीं। यदि कोई अनिवार्य आरंभ इसमें पड़ जाए — ट्रेन का समय, अस्पताल की अपॉइंटमेंट — तो निकलने से पहले विघ्नहर्ता गणेश जी की संक्षिप्त प्रार्थना ही पारंपरिक उपाय है।

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