गृह प्रवेश के तीन प्रकार
मुहूर्त ग्रंथ तीन स्थितियों में भेद करते हैं, और केवल पहली में पूरे नियम लागू होते हैं:
- अपूर्व ("पहले नहीं") — नए बने या नए ख़रीदे घर में पहली बार प्रवेश। यही प्रमुख गृह प्रवेश है और इसके लिए पूरा मुहूर्त आवश्यक है।
- सपूर्व ("पहले जैसा") — लंबे समय बाहर रहने के बाद अपने घर लौटना, जैसे स्थानांतरण या लंबी यात्रा के बाद।
- द्वंद्व — किसी आपदा — आग, बाढ़, बीमारी — के कारण घर छोड़ने के बाद, या बड़े पुनर्निर्माण के बाद लौटना।
सपूर्व और द्वंद्व प्रवेश के लिए पंचांग का कोई शुभ दिन सामान्यतः पर्याप्त है; नीचे दिए मास के प्रतिबंध मुख्यतः अपूर्व प्रवेश पर लागू होते हैं।
मास और काल
नए घर में प्रवेश के लिए माघ, फाल्गुन, वैशाख और ज्येष्ठ सबसे अधिक अनुशंसित मास हैं। टालने योग्य हैं चातुर्मास के चार मास (लगभग आषाढ़ से कार्तिक तक, जब भगवान विष्णु शयन में माने जाते हैं), खरमास, और गुरु या शुक्र के अस्त रहने का समय। पितृ पक्ष भी टाला जाता है।
नक्षत्र, तिथि और वार
- नक्षत्र: घर स्थायी रहने के लिए होता है, इसलिए ध्रुव (स्थिर) नक्षत्र — रोहिणी, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद — आदर्श हैं, साथ में मृदु नक्षत्र: मृगशिरा, चित्रा, अनुराधा और रेवती।
- तिथि: शुक्ल पक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी श्रेष्ठ हैं। रिक्ता तिथियाँ और अमावस्या टाली जाती हैं।
- वार: मंगलवार लगभग सर्वत्र टाला जाता है (मंगल अग्नि का स्वामी है)। बहुत-से लोग रविवार भी टालते हैं। सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार श्रेष्ठ माने जाते हैं।
- लग्न: प्रवेश के क्षण स्थिर राशि — वृषभ, सिंह, वृश्चिक या कुंभ — का लग्न स्थायित्व के लिए शास्त्रीय रूप से श्रेष्ठ माना जाता है।
विधि, क्रम से
- एक दिन पहले: घर की सफ़ाई, द्वार पर आम के पत्तों और गेंदे का तोरण, देहरी पर रंगोली, और द्वार के दोनों ओर स्वस्तिक।
- वास्तु शांति और गणेश पूजन: पुरोहित गणेश पूजन, वास्तु पुरुष और नवग्रहों की पूजा करते हैं, और प्रायः स्थान की शुद्धि के लिए छोटा हवन।
- प्रवेश: गृहस्वामी — प्रायः पति-पत्नी साथ — दाहिना पैर पहले रखकर प्रवेश करते हैं, हाथ में आम के पत्तों और नारियल वाला जल-कलश लेकर। कई परिवारों में घर की स्त्री देहरी पर रखा चावल से भरा पात्र पैर से गिराती है, जैसे नववधू के आगमन पर।
- दूध उफनना: नई रसोई में सबसे पहला काम दूध उबालना है, यहाँ तक कि वह उफनकर बाहर आ जाए — यह समृद्धि का शुभ संकेत है — और फिर कुछ मीठा, प्रायः खीर, बनाकर पहले भगवान को भोग लगाया जाता है।
- भोजन और आशीर्वाद: पुरोहितों, परिवार और पड़ोसियों को भोजन कराया जाता है, और परिवार को उस रात घर में ही सोना चाहिए, उसे ख़ाली नहीं छोड़ना चाहिए।
व्यावहारिक प्रश्न
क्या मुहूर्त से पहले फ़र्नीचर ले जा सकते हैं?
कई परिवार इससे बचते हैं, पर भारी सामान पहले ले जाना आम है; मुहूर्त को वह क्षण माना जाता है जब परिवार स्वयं प्रवेश करता है और रसोई पहली बार जलती है।
यदि कब्ज़े की तारीख़ तय है और कोई मुहूर्त नहीं मिलता?
कब्ज़ा ले लें, घर बंद और ख़ाली रखें, और अगली शुभ तिथि पर विधिवत प्रवेश करें। या अक्षय तृतीया जैसे किसी अबूझ मुहूर्त का उपयोग करें।
किराये का घर?
किराये के घर के लिए किसी भी शुभ दिन साधारण गणेश पूजन और कलश के साथ प्रवेश सामान्यतः पर्याप्त माना जाता है।
