व्यापार के कारक ग्रह
ज्योतिष में बुध वाणिज्य, हिसाब-किताब, संवाद और मोल-भाव का कारक है, और गुरु धन, विस्तार और सद्बुद्धि का। इसीलिए बुधवार और गुरुवार व्यापार आरंभ के पारंपरिक दिन हैं, और अच्छे मुहूर्त में देखा जाता है कि उस दिन इनमें से कोई ग्रह अस्त या बहुत पीड़ित न हो।
दिन का चुनाव
- नक्षत्र: क्षिप्र नक्षत्र — अश्विनी, पुष्य, हस्त — व्यापार के लिए श्रेष्ठ हैं, साथ ही चित्रा, अनुराधा और रेवती जैसे मृदु तथा श्रवण और धनिष्ठा जैसे चर नक्षत्र। कारख़ाने या स्थायी कार्यालय के लिए रोहिणी और तीनों उत्तरा जैसे स्थिर नक्षत्र भी अच्छे हैं।
- तिथि: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी और पूर्णिमा सामान्यतः ग्राह्य हैं; रिक्ता तिथियाँ और अमावस्या टालें (दीपावली प्रसिद्ध अपवाद है — नीचे देखें)।
- वार: बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार सर्वश्रेष्ठ; सोमवार भी ठीक है। उद्घाटन के लिए मंगलवार और शनिवार सामान्यतः टाले जाते हैं।
- टालें: भद्रा, राहु काल, खरमास और पितृ पक्ष।
समय का चुनाव
गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के व्यापारी समाज परंपरा से उद्घाटन का सटीक समय चौघड़िया से तय करते हैं: लाभ स्वाभाविक रूप से सबसे प्रिय है, उसके बाद अमृत और शुभ। शटर उठने के क्षण स्थिर लग्न (वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ) होना एक अतिरिक्त परिष्कार है जो कई ज्योतिषी जोड़ते हैं।
पारंपरिक उद्घाटन के दिन
- दीपावली — चोपड़ा पूजन / शारदा पूजन: लक्ष्मी पूजन की रात व्यापारी नए बही-खातों (चोपड़ा) की पूजा करते हैं, पहले पृष्ठ पर "शुभ", "लाभ" और स्वस्तिक लिखते हैं। गुजरात में अगले दिन से परंपरागत नया वर्ष आरंभ होता है। यहाँ अमावस्या का नियम लागू ही नहीं होता — लक्ष्मी की रात उसे पीछे छोड़ देती है। देखें दीपावली।
- अक्षय तृतीया, विजयादशमी और गुड़ी पड़वा — अबूझ मुहूर्त के दिन, जब अलग गणना की आवश्यकता नहीं।
- गुरु पुष्य और रवि पुष्य योग — माल, सोना और नए उपकरण ख़रीदने के लिए श्रेष्ठ।
उद्घाटन की पूजा
- स्थान की सफ़ाई करें और द्वार पर तोरण लगाएँ। प्रवेश पर स्वस्तिक बनाएँ, बाईं ओर "शुभ" और दाईं ओर "लाभ" — लोक-परंपरा में गणेश जी के दो पुत्रों के नाम।
- कलश के साथ गणेश और लक्ष्मी पूजन करें, और उनके चित्र वहाँ रखें जहाँ नक़दी रखी जाती है।
- बही-खाते, गल्ले, तराज़ू या कंप्यूटर — व्यापार के उपकरणों — की पूजा करें।
- पहली बिक्री (बोहनी) किसी परिचित, प्रसन्नचित्त ग्राहक को करें, और पहली कमाई दान या मंदिर में दें।
एक व्यावहारिक स्मरण
मुहूर्त एक अच्छा आरंभ है, व्यापार की योजना नहीं। परंपरा स्वयं लक्ष्मी को गणेश — बुद्धि और विघ्न-नाश — के साथ पूजती है, मानो कह रही हो कि धन सही निर्णय, ईमानदार व्यवहार और परिश्रम के पीछे-पीछे आता है।
