मूल पाठ
सूर्य: ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः॥ चन्द्र: ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः॥ मंगल: ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः॥ बुध: ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः॥ बृहस्पति: ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः॥ शुक्र: ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः॥ शनि: ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः॥ राहु: ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः॥ केतु: ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः॥
लिप्यंतरण
Surya: Om Hram Hreem Hraum Sah Suryaya Namah Chandra: Om Shram Shreem Shraum Sah Chandramase Namah Mangal: Om Kram Kreem Kraum Sah Bhaumaya Namah Budh: Om Bram Breem Braum Sah Budhaya Namah Brihaspati: Om Gram Greem Graum Sah Gurave Namah Shukra: Om Dram Dreem Draum Sah Shukraya Namah Shani: Om Pram Preem Praum Sah Shanaishcharaya Namah Rahu: Om Bhram Bhreem Bhraum Sah Rahave Namah Ketu: Om Sram Sreem Sraum Sah Ketave Namah
नवग्रह क्या हैं
ग्रह का अर्थ ठीक-ठीक "planet" नहीं है। यह ग्रह् धातु से बना है, जिसका अर्थ है "पकड़ना", यानी वह जो व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करे। इसीलिए नौ ग्रहों में सूर्य और चंद्रमा शामिल हैं, पृथ्वी नहीं है, और दो ऐसे बिंदु गिने जाते हैं जो पिंड हैं ही नहीं: राहु और केतु, जहाँ चंद्रमा का मार्ग सूर्य के मार्ग को काटता है और जहाँ ग्रहण होते हैं। बाकी पाँच, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि, वे ग्रह हैं जो आँखों से दिखते हैं। ज्योतिष में हर ग्रह एक वार, एक रंग, एक रत्न, एक अनाज और जीवन के कुछ क्षेत्रों का स्वामी है, और हर ग्रह के अपने मंत्र हैं।
एक नज़र में सभी नौ बीज मंत्र
हर ग्रह का बीज (या तांत्रोक्त) मंत्र एक ही ढाँचे पर है: ॐ, एक ही व्यंजन से बने तीन बीजाक्षर, समापन बीज सः, और ग्रह का नाम नमः के साथ। संख्या वह कुल जप है जो हर ग्रह के पूर्ण अनुष्ठान के लिए पारंपरिक रूप से बताया जाता है, जिसे कई दिनों में 108 की बैठकों में पूरा किया जाता है।
| ग्रह | वार | बीज मंत्र | पारंपरिक संख्या |
|---|---|---|---|
| सूर्य | रविवार | ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः | 7,000 |
| चंद्र | सोमवार | ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः | 11,000 |
| मंगल | मंगलवार | ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः | 10,000 |
| बुध | बुधवार | ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः | 9,000 |
| बृहस्पति | गुरुवार | ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः | 19,000 |
| शुक्र | शुक्रवार | ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः | 16,000 |
| शनि | शनिवार | ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः | 23,000 |
| राहु | शनिवार | ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः | 18,000 |
| केतु | मंगलवार या शनिवार | ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः | 17,000 |
ये संख्याएँ अधिकतर ज्योतिष ग्रंथों में मिलती हैं, पर पुस्तकों में अंतर है, और कुछ ज्योतिषी कलियुग के लिए इन्हें चार गुना कर देते हैं। आपके कुल-पुरोहित कोई और संख्या बताएँ तो वही मानें। हर ग्रह के अपने पृष्ठ पर उसका नाम मंत्र, ध्यान श्लोक और पूरी विधि है।
ग्रह मंत्रों के चार प्रकार
- नाम मंत्र: सबसे छोटा रूप, एक बीजाक्षर और नाम, जैसे ॐ शुं शुक्राय नमः या ॐ शं शनैश्चराय नमः। इससे शुरुआत सबसे आसान है, और ज्योतिषी जब "शुक्र मंत्र" कहते हैं तो प्रायः यही होता है।
- बीज या तांत्रोक्त मंत्र: ऊपर तालिका वाला तीन बीजाक्षरों का रूप, जो गिनती वाले अनुष्ठान में जपा जाता है।
- गायत्री मंत्र: हर ग्रह की गायत्री छंद में एक प्रार्थना भी है ("हम जानें… ध्यान करें… वे प्रेरित करें")। ये नीचे दी गई हैं।
- स्तोत्र श्लोक: व्यास रचित माने जाने वाले नवग्रह स्तोत्र के नौ श्लोक, जो जपाकुसुम संकाशं से आरंभ होते हैं, हर ग्रह के लिए एक। ये बीजाक्षरों से आवाहन करने के बजाय ग्रह की स्तुति करते हैं, और बहुत लोग दैनिक पाठ के लिए इन्हें पसंद करते हैं।
नवग्रह गायत्री मंत्र
बीज मंत्रों के विपरीत ग्रह गायत्रियाँ सब पुस्तकों में एक समान नहीं हैं: कई के दो-तीन रूप प्रचलित हैं। नीचे वे रूप हैं जो हर ग्रह के पृष्ठ पर दिए गए हैं, जहाँ अन्य रूप भी बताए गए हैं।
- सूर्य: ॐ आदित्याय विद्महे प्रभाकराय धीमहि। तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्॥
- चंद्र: ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृततत्त्वाय धीमहि। तन्नश्चन्द्रः प्रचोदयात्॥
- मंगल: ॐ अंगारकाय विद्महे शक्तिहस्ताय धीमहि। तन्नः भौमः प्रचोदयात्॥
- बुध: ॐ चन्द्रपुत्राय विद्महे रोहिणीप्रियाय धीमहि। तन्नो बुधः प्रचोदयात्॥
- बृहस्पति: ॐ आंगिरसाय विद्महे दण्डायुधाय धीमहि। तन्नः जीवः प्रचोदयात्॥
- शुक्र: ॐ भृगुपुत्राय विद्महे विन्देशाय धीमहि। तन्नः शुक्रः प्रचोदयात्॥
- शनि: ॐ शनैश्चराय विद्महे सूर्यपुत्राय धीमहि। तन्नो मन्दः प्रचोदयात्॥
- राहु: ॐ शिरोरूपाय विद्महे अमृतेशाय धीमहि। तन्नो राहुः प्रचोदयात्॥
- केतु: ॐ गदाहस्ताय विद्महे अमृतेशाय धीमहि। तन्नः केतुः प्रचोदयात्॥
ध्यान दें कि विशेषण हर ग्रह की कथा कहते हैं। चंद्रमा "क्षीर सागर के पुत्र" हैं, क्योंकि वे समुद्र मंथन से निकले। बृहस्पति "आंगिरस" हैं, अंगिरा ऋषि के पुत्र। शुक्र "भृगु के पुत्र" हैं। राहु "केवल सिर रूप" हैं, क्योंकि अमृत पीते समय विष्णु के चक्र ने उन्हें काट दिया था, और केतु, जो धड़ बचा, "गदा धारण करते हैं"।
कौन-सा मंत्र जपें?
- एक ग्रह के लिए: यदि ज्योतिषी ने किसी विशेष ग्रह की ओर संकेत किया है, या आप उसकी दशा में हैं, या शनि की साढ़े साती जैसे प्रसिद्ध प्रभाव में हैं, तो उस ग्रह का मंत्र उसके वार को जपें। एक समय में एक ग्रह सामान्य परंपरा है; रोज़ सभी नौ बीज मंत्र जपना आवश्यक नहीं।
- सभी नौ के लिए एक साथ: सुबह एक श्लोक का ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी पढ़ें, या पूरा नवग्रह स्तोत्र। दोनों में एक-दो मिनट लगते हैं और ये पारंपरिक रूप से सामान्य ग्रह शांति के लिए पढ़े जाते हैं।
- ज्योतिष के बिना: बहुत लोग बस वार का मंत्र जपते हैं: रविवार को सूर्य, सोमवार को चंद्र, और इसी तरह पूरे सप्ताह। यह अपने आप में अच्छी भक्ति साधना है।
ग्रह जप की विधि
- ग्रह के अपने वार से आरंभ करें, हो सके तो शुक्ल पक्ष में। अधिकतर ग्रहों के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा है।
- स्नान करके पूर्व की ओर मुख करके बैठें, दीपक जलाएँ, और हो सके तो ग्रह के रंग की कोई वस्तु पास रखें: सूर्य और मंगल के लिए लाल, चंद्र और शुक्र के लिए सफेद, बुध के लिए हरा, बृहस्पति के लिए पीला, और शनि, राहु, केतु के लिए गहरा नीला या काला।
- गिनती वाले अनुष्ठान के लिए छोटा संकल्प लें: अपना नाम, ग्रह, कुल संख्या और कितने दिनों में पूरा करेंगे।
- हर दिन एक ही समय पर उतनी ही मालाएँ जपें जब तक कुल संख्या पूरी न हो। सभी ग्रहों के लिए प्रायः रुद्राक्ष की माला ली जाती है; कुछ परंपराओं में मंगल के लिए मूँगा, चंद्र के लिए मोती या स्फटिक आदि।
- अंत में ग्रह से जुड़ा दान दें, जैसे सूर्य के लिए गेहूँ और गुड़, चंद्र के लिए चावल और दूध, या शनि के लिए काले तिल और सरसों का तेल।
एक सावधानी
ग्रह मंत्र भक्तिमय उपाय हैं, चिकित्सा, आर्थिक या कानूनी सहायता का विकल्प नहीं। ध्यान से जपा गया बीज मंत्र हानिकारक नहीं है, पर संकल्प के साथ बड़ा अनुष्ठान एक प्रतिबद्धता है, और अधिकतर परिवार इसे पुरोहित की सहायता से करते हैं या कम से कम आरंभ करते हैं। यदि आप किसी के बताए "दोष" के कारण जप कर रहे हैं, तो डर में 23,000 का अनुष्ठान उठाने से पहले कुंडली पर दूसरी राय ले लेना उचित है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नवग्रहों के नौ बीज मंत्र कौन-से हैं?
सूर्य: ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः। चंद्र: ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः। मंगल: ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः। बुध: ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः। गुरु: ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः। शुक्र: ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः। शनि: ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः। राहु: ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः। केतु: ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः।
क्या रोज़ सभी नौ ग्रहों के मंत्र जप सकते हैं?
जप सकते हैं, पर यह सामान्य परंपरा नहीं है। सभी नौ के लिए एक साथ नवग्रह स्तोत्र या ब्रह्मा मुरारि श्लोक पारंपरिक विकल्प है; बीज मंत्र प्रायः एक समय में एक ग्रह के लिए जपे जाते हैं।
राहु और केतु का अपना वार क्यों नहीं है?
वे छाया ग्रह हैं, जिनका सात दिनों के सप्ताह में कोई दिन नहीं। राहु की उपासना प्रायः शनिवार को शनि के साथ, और केतु की मंगलवार या शनिवार को होती है।
क्या शनि के लिए 23,000 जैसी पूरी संख्या करना ज़रूरी है?
केवल तभी, जब आपने पूर्ण अनुष्ठान का संकल्प लिया हो। रोज़ एक माला (108) का जप अपने आप में पूर्ण साधना है।
नाम मंत्र और बीज मंत्र में क्या अंतर है?
नाम मंत्र में एक बीजाक्षर होता है, जैसे ॐ शुं शुक्राय नमः। बीज (तांत्रोक्त) मंत्र में तीन बीजाक्षर और "सः" होते हैं, जैसे ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः। गिनती वाले अनुष्ठान में बीज रूप जपा जाता है।
क्या सभी नौ ग्रहों का एक मंत्र है?
हाँ। ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी श्लोक में ब्रह्मा, विष्णु और शिव के साथ सभी नौ ग्रहों के नाम हैं, और इसे सबके लिए एक साथ पढ़ा जाता है।
शुरुआत किस ग्रह के मंत्र से करें?
यदि चुनने का कोई ज्योतिषीय कारण नहीं है, तो जिस दिन आरंभ कर रहे हैं उस वार के मंत्र से, या सूर्य से शुरू करें, जिनकी सूर्योदय पर अर्घ्य के साथ उपासना सभी ग्रह साधनाओं में सबसे पुरानी और सरल है।
कोई त्रुटि दिखे?
यदि आपको इस पृष्ठ पर व्याकरण, हिंदी, अंग्रेज़ी, मंत्र-पाठ या किसी भी प्रकार की त्रुटि दिखे, तो हमें बताएँ — हम 24 घंटे में उसे ठीक कर देंगे।
