मूल पाठ
ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः ॥ ॥ नवग्रह स्तोत्र से मंगल का श्लोक ॥ धरणीगर्भसंभूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम् । कुमारं शक्तिहस्तं तं मङ्गलं प्रणमाम्यहम् ॥
लिप्यंतरण
Om Kram Kreem Kraum Sah Bhaumaya Namah. Mangal's verse from the Navagraha Stotra: Dharanigarbhasambhutam vidyutkantisamaprabham. Kumaram shaktihastam tam mangalam pranamamyaham.
मंगल कौन हैं
मंगल ग्रह नौ ग्रहों (नवग्रह) में से एक हैं। उन्हें भौम या भूमिपुत्र — "पृथ्वी के पुत्र" — कहा जाता है, और मंत्र उन्हें इसी नाम से पुकारता है: भौमाय नमः, "भूमि के पुत्र को नमस्कार।" ज्योतिष में वे साहस, ऊर्जा, भूमि-संपत्ति, भाई, रक्त और चोट के कारक हैं। मंदिरों में वे लाल वर्ण, चतुर्भुज और मेष (भेड़ा) पर सवार दिखाए जाते हैं।
इस पृष्ठ के दो मंत्र
- बीज मंत्र: ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः। क्रां, क्रीं, क्रौं और सः बीजाक्षर हैं, जिनका अनुवाद नहीं होता; वे ध्वनि में ग्रह की ऊर्जा धारण करते हैं। इसके पीछे की प्रार्थना यह है कि यह उग्र ऊर्जा क्रोध और कलह के बजाय साहस और संयमित कर्म में बदले।
- पौराणिक श्लोक: व्यास-रचित माने जाने वाले नवग्रह स्तोत्र का मंगल-श्लोक: "पृथ्वी के गर्भ से उत्पन्न, बिजली की कांति के समान प्रभा वाले, हाथ में शक्ति (भाला) धारण करने वाले कुमार मंगल को मैं प्रणाम करता हूँ।" जिन्हें बीजाक्षरों के बजाय स्तुति-श्लोक अच्छा लगे, उनके लिए यह सौम्य विकल्प है।
जप कैसे करें
- दिन: मंगलवार, मंगल का दिन। शुक्ल पक्ष के किसी मंगलवार से आरंभ करें।
- समय: सुबह स्नान के बाद।
- आसन और रंग: दक्षिण या पूर्व की ओर मुख करके लाल आसन पर; चाहें तो लाल या नारंगी वस्त्र पहनें।
- माला: मूँगे या लाल चंदन की माला पारंपरिक है; रुद्राक्ष भी चलता है। एक माला 108 की।
- संख्या: हर मंगलवार एक माला, या 21 या 40 दिन तक प्रतिदिन। बड़ी संख्या का जप प्रायः औपचारिक ग्रह शांति में पुरोहित द्वारा होता है।
- अर्पण: लाल फूल, लाल चंदन, गुड़ और साबुत मसूर। बहुत-से लोग मंगलवार को हनुमान मंदिर भी जाते हैं, क्योंकि हनुमान उपासना मंगल का पारंपरिक उपाय है।
मांगलिक दोष पर एक बात
विवाह-मिलान में मंगल (मांगलिक) दोष के लिए सबसे अधिक यही मंत्र सुझाया जाता है। इस पर निर्भर होने से पहले यह पढ़ लेना उचित है कि दोष वास्तव में कैसे देखा जाता है, और किन अनेक स्थितियों में यह निरस्त हो जाता है — हमारी मंगल दोष मार्गदर्शिका यह समझाती है। मंत्र हर स्थिति में शुभ प्रार्थना है, पर विवाह जैसा बड़ा निर्णय एक ग्रह-स्थिति के भय पर नहीं टिकना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मंगल का बीज मंत्र क्या है?
"ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः।" क्रां, क्रीं, क्रौं मंगल के बीजाक्षर हैं, और भौम — "पृथ्वी के पुत्र" — उनका नाम है।
मंगल मंत्र का कितना जप करें?
घरेलू अभ्यास में मंगलवार को एक माला (108) सामान्य है। बड़ी संख्या प्रायः पुरोहित के साथ औपचारिक ग्रह शांति में होती है।
क्या यह मंत्र मांगलिक दोष दूर करता है?
ज्योतिषी इसे पारंपरिक उपाय के रूप में सुझाते हैं। कुंडली में दोष लागू होता भी है या नहीं, यह कई परिहार-नियमों पर निर्भर है — पहले वह देखें; मंत्र हर स्थिति में लाभकारी है।
क्या महिलाएँ मंगल बीज मंत्र का जप कर सकती हैं?
हाँ। बहुत-सी मांगलिक कन्याएँ विवाह से पहले स्वयं इसका जप करती हैं। चाहें तो नवग्रह स्तोत्र का मंगल-श्लोक सौम्य विकल्प है।
मंगल के लिए हनुमान जी की पूजा क्यों?
दोनों मंगलवार, लाल रंग, बल और साहस से जुड़े हैं। मंगलवार को हनुमान उपासना पीड़ित मंगल का सबसे प्रचलित लोक-उपाय है।
किस दिशा में मुख करें?
दक्षिण दिशा मंगल से जुड़ी है; दैनिक जप के लिए पूर्व भी ठीक है।
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