गुरुकुल एवं संस्कृत शिक्षा निर्देशिका
साहित्य, आचार्य, ज्योतिष, वेद और भारतीय संस्कृति की शिक्षा देने वाले विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, विद्यापीठ और गुरुकुल।
35 संस्थान
गुरुकुलआर्ष विद्या गुरुकुलम्, आनैकट्टी (कोयंबटूर)
Coimbatore, Tamil Nadu · स्थापना 1990
अद्वैत वेदान्त और संस्कृत के पारंपरिक अध्ययन का आवासीय गुरुकुलम्, जिसकी स्थापना 1990 में स्वामी दयानन्द सरस्वती ने कोयंबटूर से लगभग 25 कि.मी. दूर नीलगिरि की तलहटी में की। छात्र आचार्य के साथ रहकर सम्प्रदाय की परंपरागत शैली में उपनिषद्, भगवद्गीता और ब्रह्मसूत्र पढ़ते हैं।
- दर्शन
महाविद्यालयकेन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, भोपाल परिसर
Bhopal, Madhya Pradesh · स्थापना 2002
केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का भोपाल परिसर, जो 2002–03 सत्र से चल रहा है। यहाँ साहित्य, व्याकरण, ज्योतिष और जैन दर्शन में प्राक्शास्त्री से आचार्य और पीएच.डी., साथ में बी.एड., एम.एड., वास्तुशास्त्र में डिप्लोमा, और संस्कृत नाटकों का मंचन करने वाला नाट्यशास्त्र अनुसंधान केंद्र है।
- साहित्य
- व्याकरण
- ज्योतिष
- दर्शन
संस्थानकेन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, गंगानाथ झा परिसर, प्रयागराज
Prayagraj, Uttar Pradesh · स्थापना 1 April 1971 (as a Kendriya Sanskrit Vidyapeetha)
आज़ाद पार्क स्थित केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का प्रयागराज परिसर, जो पहले श्री गंगानाथ झा अनुसंधान संस्थान था। यह संस्कृत वाङ्मय के अनुसंधान को समर्पित केंद्र है, जहाँ शोधार्थी विद्यावारिधि (पीएच.डी.) के लिए पंजीकृत होते हैं, और इसका पुस्तकालय व पांडुलिपि विभाग बाहरी विद्वानों के लिए संदर्भ पुस्तकालय के रूप में खुला है।
- साहित्य
- भारतीय संस्कृति
महाविद्यालयकेन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, गुरुवायूर परिसर, त्रिशूर
Thrissur, Kerala · स्थापना 1979 (as a Kendriya Sanskrit Vidyapeetha); teaching since 1934
त्रिशूर के पास गुरुवायूर के मार्ग पर पुरनाट्टुकरा में स्थित केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का केरल परिसर। यह गुरुवायूर साहित्य दीपिका संस्कृत विद्यापीठ के रूप में आरंभ हुआ, जिसने 1934 में उपाधि पाठ्यक्रम शुरू किए, और यहाँ साहित्य, व्याकरण, अद्वैत वेदान्त और न्याय में आचार्य और पीएच.डी. तक पढ़ाई होती है।
- साहित्य
- व्याकरण
- दर्शन
- ज्योतिष
महाविद्यालयकेन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, लखनऊ परिसर
Lucknow, Uttar Pradesh · स्थापना 1986
गोमती नगर स्थित केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का लखनऊ परिसर, जिसकी स्थापना 1986 में हुई। यहाँ व्याकरण, साहित्य, बौद्ध दर्शन, ज्योतिष और वेद में प्राक्शास्त्री से आचार्य और पीएच.डी. तक पढ़ाई, संस्कृत शिक्षक प्रशिक्षण (बी.एड.), और पालि अध्ययन केंद्र है।
- व्याकरण
- साहित्य
- दर्शन
- ज्योतिष
विश्वविद्यालयकेन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
New Delhi, Delhi · स्थापना 1970
यह स्वयं को विश्व का सबसे बड़ा और एकमात्र बहु-परिसरीय भाषा विश्वविद्यालय बताता है। इसका आरंभ 1970 में राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के रूप में हुआ, 2002 में यह मानद विश्वविद्यालय और 2020 में केंद्रीय विश्वविद्यालय बना। जम्मू और कांगड़ा से लेकर पुरी, शृंगेरी और गुरुवायूर तक फैले इसके परिसरों में विद्यालय स्तर से लेकर शास्त्री, आचार्य और विद्यावारिधि (पीएच.डी.) तक संस्कृत पढ़ाई जाती है, जिसमें साहित्य, व्याकरण और ज्योतिष जैसे विषय शामिल हैं।
- साहित्य
- आचार्य
- ज्योतिष
- व्याकरण
महाविद्यालयकेन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, राजीव गांधी परिसर, शृंगेरी
Sringeri, Karnataka · स्थापना 13 January 1992
शृंगेरी शारदा पीठम् के पास 1992 में स्थापित केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का शृंगेरी परिसर, जहाँ संस्कृत ही अध्यापन का माध्यम है। यहाँ व्याकरण, ज्योतिष, मीमांसा, न्याय, वेदान्त और साहित्य में प्राक्शास्त्री से आचार्य और पीएच.डी., साथ में बी.एड. और वास्तु में डिप्लोमा की पढ़ाई होती है।
- व्याकरण
- ज्योतिष
- दर्शन
- साहित्य
महाविद्यालयकेन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, श्री महाराजा रणबीर सिंह परिसर, जम्मू
Jammu, Jammu and Kashmir · स्थापना 1 April 1971 (as a Kendriya Sanskrit Vidyapeetha)
केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का जम्मू परिसर, जो जम्मू-कश्मीर के शासकों द्वारा स्थापित श्री रघुनाथ संस्कृत महाविद्यालय से विकसित हुआ। यहाँ वेद, व्याकरण, ज्योतिष, दर्शन, साहित्य और काश्मीर शैव दर्शन में प्राक्शास्त्री से आचार्य और पीएच.डी. तक, तथा संस्कृत शिक्षकों के लिए बी.एड. और एम.एड. की पढ़ाई होती है।
- वेद
- व्याकरण
- ज्योतिष
- दर्शन
महाविद्यालयकेन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर, देवप्रयाग
Devprayag, Uttarakhand · स्थापना 1908 (as a Mahavidyalaya); campus since 16 June 2016
भागीरथी और अलकनंदा के संगम पर, जहाँ से गंगा आरंभ होती है, स्थित केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का देवप्रयाग परिसर। यह 1908 में स्थापित श्री रघुनाथ कीर्ति आदर्श संस्कृत महाविद्यालय से विकसित हुआ, और यहाँ व्याकरण, ज्योतिष, साहित्य, वेद और न्याय में प्राक्शास्त्री से आचार्य तक पढ़ाई होती है।
- व्याकरण
- ज्योतिष
- साहित्य
- वेद
महाविद्यालयकेन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, श्री सदाशिव परिसर, पुरी
Puri, Odisha · स्थापना 15 August 1971 (as a Kendriya Sanskrit Vidyapeetha)
केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का पुरी परिसर, जो पहले ओडिशा सरकार का सदाशिव संस्कृत कॉलेज था। यहाँ ग्यारह विभागों में प्राक्शास्त्री से आचार्य और पीएच.डी. तक पढ़ाई होती है — साहित्य, नव्य व्याकरण और धर्मशास्त्र से लेकर ज्योतिष की दोनों शाखाओं, अद्वैत वेदान्त, सांख्य-योग और नव्य न्याय तक।
- साहित्य
- व्याकरण
- ज्योतिष
- दर्शन
विद्यापीठचिन्मय विश्व विद्यापीठ, केरल
Onakkoor, Kerala · स्थापना 2016
यूजीसी अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत 2016 में स्थापित एक नवीन (डी नोवो) मानद विश्वविद्यालय, जो स्वयं को भारत का पहला भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) मानद विश्वविद्यालय बताता है। मानविकी, वाणिज्य, शिक्षा, प्रदर्शन कला और अभियांत्रिकी के इसके पाठ्यक्रम भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ गुँथे हुए हैं।
- भारतीय संस्कृति
संस्थानडेक्कन कॉलेज स्नातकोत्तर एवं शोध संस्थान, पुणे
Pune, Maharashtra · स्थापना 6 October 1821
एक मानद विश्वविद्यालय, जिसका आरंभ 6 अक्टूबर 1821 को एक संस्कृत पाठशाला के रूप में हुआ — यह भारत के सबसे पुराने शिक्षण संस्थानों में से है। यह संस्कृत, भाषाविज्ञान और पुरातत्व के शोध के लिए प्रसिद्ध है — जिसमें ऐतिहासिक सिद्धांतों पर आधारित संस्कृत का विश्वकोशीय शब्दकोश भी शामिल है — और यहाँ संस्कृत एवं कोशविज्ञान में एम.ए. उपलब्ध है।
- साहित्य
- भारतीय संस्कृति
विश्वविद्यालयदेव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार
Haridwar, Uttarakhand · स्थापना 2002
शांतिकुंज, हरिद्वार स्थित विश्वविद्यालय, जिसकी स्थापना 2002 में उत्तराखंड विधानसभा के अधिनियम से पं. श्रीराम शर्मा आचार्य और माता भगवती देवी शर्मा के आदर्शों पर हुई। संस्कृत और वैदिक अध्ययन के साथ यह योग शिक्षा के लिए जाना जाता है — बी.एससी. योगिक साइंस से लेकर एम.एससी. योग थेरेपी तक — और यहाँ इतिहास एवं भारतीय संस्कृति में एम.ए. भी उपलब्ध है।
- साहित्य
- वेद
- योग
- भारतीय संस्कृति
विश्वविद्यालयसंस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय
Varanasi, Uttar Pradesh · स्थापना 1918
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय का पारंपरिक शास्त्र संकाय, जिसकी स्थापना 1918 में हुई — पं. मदन मोहन मालवीय द्वारा विश्वविद्यालय की स्थापना के दो वर्ष बाद — और जो पहले प्राच्य विद्या संकाय कहलाता था। आठ विभागों वाला यह संकाय वेद, व्याकरण, साहित्य, ज्योतिष, दर्शन, धर्मशास्त्र आदि में शास्त्री और आचार्य तथा विद्यावारिधि (पीएच.डी.) पढ़ाता है, और 1926 से “विश्वपंचांग” प्रकाशित करता है।
- साहित्य
- आचार्य
- ज्योतिष
- वेद
गुरुकुलगुरुकुल कांगड़ी (समविश्वविद्यालय), हरिद्वार
Haridwar, Uttarakhand · स्थापना 4 March 1902
4 मार्च 1902 को स्वामी श्रद्धानन्द द्वारा हरिद्वार के निकट गंगा तट पर प्राचीन गुरुकुल पद्धति के पुनरुद्धार हेतु स्थापित, और अब यूजीसी द्वारा वित्तपोषित समविश्वविद्यालय। यहाँ आधुनिक विषयों के साथ वेद, संस्कृत और दर्शन पढ़ाए जाते हैं, जिनमें ज्योतिर्विज्ञान एवं वैदिक कर्मकाण्ड में एम.ए. और एक-वर्षीय वैदिक पौरोहित्य-कर्मकाण्ड पाठ्यक्रम भी शामिल हैं।
- साहित्य
- ज्योतिष
- वेद
- दर्शन
विश्वविद्यालयकामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा
Darbhanga, Bihar · स्थापना 26 January 1961
बिहार का संस्कृत विश्वविद्यालय, जिसकी स्थापना 26 जनवरी 1961 को दरभंगा के महाराजाधिराज डॉ. सर कामेश्वर सिंह की दानशीलता से हुई। स्थापना के समय इसका अधिकार-क्षेत्र पूरा भारत था, अब पूरा बिहार राज्य है। यहाँ उपशास्त्री से लेकर शास्त्री, आचार्य, शिक्षाशास्त्री (बी.एड.) और पीएच.डी. तक की शिक्षा दी जाती है।
- साहित्य
- आचार्य
विश्वविद्यालयकर्नाटक संस्कृत विश्वविद्यालय, बेंगलूरु
Bengaluru, Karnataka · स्थापना 2010
बेंगलूरु स्थित कर्नाटक का संस्कृत विश्वविद्यालय, जिसे राज्य सरकार ने कर्नाटक संस्कृत विश्वविद्यालय अधिनियम, 2009 के अंतर्गत 2010 में स्थापित किया। यहाँ संस्कृत में बी.ए. और शास्त्र में बी.ए., व्याकरण, वेदान्त व न्याय-वैशेषिक संकाय, ज्योतिष अध्ययन केंद्र और पीएच.डी. पाठ्यक्रम हैं — और विद्यालय में संस्कृत न पढ़े विद्यार्थियों को अपनी प्रवेश परीक्षा से प्रवेश मिलता है।
- साहित्य
- ज्योतिष
- व्याकरण
- दर्शन
विश्वविद्यालयकविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय, रामटेक
Ramtek, Maharashtra · स्थापना 18 September 1997
महाराष्ट्र का पहला संस्कृत विश्वविद्यालय, जिसकी स्थापना राज्य सरकार ने 18 सितंबर 1997 को नागपुर ज़िले के रामटेक में की और जिसका नाम महाकवि कालिदास के नाम पर रखा गया, जिनका रामटेक से पारंपरिक संबंध माना जाता है। यहाँ वेद, व्याकरण, साहित्य, वेदान्त, ज्योतिष और दर्शन में सन्मानित शास्त्री (बी.ए. ऑनर्स) और आचार्य (एम.ए.), तथा वेदांग ज्योतिष और योगशास्त्र में बी.ए. व एम.ए. उपलब्ध हैं।
- साहित्य
- आचार्य
- ज्योतिष
- वेद
विश्वविद्यालयकुमार भास्कर वर्मा संस्कृत एवं प्राचीन अध्ययन विश्वविद्यालय, नलबाड़ी
Nalbari, Assam · स्थापना 2011
नलबाड़ी स्थित असम का संस्कृत विश्वविद्यालय, जिसकी स्थापना 2011 में हुई और जिसका नाम 7वीं शताब्दी के राजा कुमार भास्कर वर्मा पर है, जिनके शासन में असम में वैदिक संस्कृति और संस्कृत विद्या फली-फूली। यहाँ संस्कृत साहित्य, व्याकरण और ज्योतिष पढ़ाए जाते हैं, तथा कर्मकाण्ड, सस्वर वेदपाठ, धर्मशास्त्र और योग विज्ञान में सर्टिफ़िकेट पाठ्यक्रम चलते हैं।
- साहित्य
- ज्योतिष
- वेद
- व्याकरण
विश्वविद्यालयलकुलीश योग विश्वविद्यालय, अहमदाबाद
Ahmedabad, Gujarat · स्थापना April 2013
केवल योग को समर्पित गुजरात का पहला निजी विश्वविद्यालय, जिसकी स्थापना 2013 में स्वामी राजर्षि मुनि ने गुजरात निजी विश्वविद्यालय अधिनियम 2009 के अंतर्गत की, और जो यूजीसी की धारा 2(f) के अंतर्गत मान्य है। यहाँ अष्टांग योग तथा कर्म, ज्ञान और भक्ति योग संकायों के माध्यम से शिक्षक प्रशिक्षण से पीएच.डी. तक पढ़ाया जाता है।
- योग
विश्वविद्यालयमहर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन
Ujjain, Madhya Pradesh · स्थापना 2008
उज्जैन — भारतीय खगोल-ज्योतिष की ऐतिहासिक नगरी — में स्थित मध्य प्रदेश का राज्य संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, जो मध्य प्रदेश अधिनियम XV, 2008 के अंतर्गत स्थापित है और नैक से ए ग्रेड प्राप्त है। ज्योतिष इसका विशेष बल है: फलित और सिद्धान्त दोनों ज्योतिष में आचार्य, तथा ज्योतिर्विज्ञान और वास्तु में एम.ए.।
- साहित्य
- आचार्य
- ज्योतिष
- वेद
संस्थानमहर्षि सान्दीपनि राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान, उज्जैन
Ujjain, Madhya Pradesh · स्थापना 20 January 1987
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की स्वायत्त संस्था, जिसकी स्थापना 1987 में वेदपाठ की मौखिक परंपरा के संरक्षण के लिए हुई। यह देश भर की वेद पाठशालाओं और गुरु-शिष्य परंपरा इकाइयों को सहायता देती है, राष्ट्रीय आदर्श वेद विद्यालय चलाती है, और वेदभूषण व वेद-विभूषण परीक्षाएँ आयोजित करती है।
- वेद
विश्वविद्यालयमहर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय, कैथल
Kaithal, Haryana · स्थापना 2018
मून्दड़ी, कैथल स्थित हरियाणा का राज्य संस्कृत विश्वविद्यालय, जो हरियाणा अधिनियम संख्या 20/2018 द्वारा स्थापित और यूजीसी की धारा 2(f) के अंतर्गत मान्यता प्राप्त है। इसके वेद-वेदांग, साहित्य-संस्कृति और दर्शन संकायों में वेद, व्याकरण, ज्योतिष, धर्मशास्त्र, साहित्य, हिन्दू अध्ययन, दर्शन और योग विभाग हैं।
- साहित्य
- ज्योतिष
- वेद
- व्याकरण
विश्वविद्यालयराष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, तिरुपति
Tirupati, Andhra Pradesh · स्थापना 1961
तिरुपति स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय, जो पहले केन्द्रीय संस्कृत विद्यापीठ और फिर राष्ट्रिय संस्कृत विद्यापीठ कहलाता था। यहाँ सिद्धान्त व फलित ज्योतिष, अद्वैत, विशिष्टाद्वैत व द्वैत वेदान्त, साहित्य और वेदभाष्य जैसी विशेषज्ञताओं के साथ शास्त्री और आचार्य, तथा योग, शिक्षाचार्य और विद्यावारिधि (पीएच.डी.) पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं।
- साहित्य
- आचार्य
- ज्योतिष
- वेद
विश्वविद्यालयसम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी
Varanasi, Uttar Pradesh · स्थापना 1791
भारत में संस्कृत अध्ययन के सबसे पुराने केंद्रों में से एक। इसकी जड़ें 1791 में स्थापित गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज, बनारस में हैं, और 1956 के वाराणसेय संस्कृत विश्वविद्यालय अधिनियम से यह विश्वविद्यालय बना। यहाँ वेद-वेदांग, साहित्य-संस्कृति, दर्शन और श्रमण विद्या संकायों के माध्यम से शास्त्री और आचार्य पाठ्यक्रम पढ़ाए जाते हैं, और उत्तर प्रदेश के अनेक संस्कृत महाविद्यालय इससे सम्बद्ध हैं।
- साहित्य
- आचार्य
- ज्योतिष
- वेद
गुरुकुलसान्दीपनि साधनालय, पवई (मुंबई)
Mumbai, Maharashtra · स्थापना 9 January 1963
चिन्मय मिशन का अद्वैत वेदान्त का आवासीय विद्यालय, जिसकी स्थापना 1963 में स्वामी चिन्मयानन्द ने आधुनिक गुरुकुल के रूप में की। चयनित स्नातकों के लिए निःशुल्क दो वर्षीय वेदान्त पाठ्यक्रम में शांकर भाष्य सहित गीता और प्रमुख उपनिषद्, संस्कृत, पाठ और साधना शामिल हैं; 20वाँ पाठ्यक्रम 10 मई 2027 से आरंभ होगा।
- दर्शन
- व्याकरण
विश्वविद्यालयश्री जगन्नाथ संस्कृत विश्वविद्यालय, पुरी
Puri, Odisha · स्थापना 1981
पुरी के श्रीविहार में स्थित ओडिशा का संस्कृत विश्वविद्यालय, जिसकी स्थापना 1981 में हुई। शिक्षण-सह-सम्बद्धक विश्वविद्यालय के रूप में यहाँ वेद, व्याकरण, साहित्य, ज्योतिर्विज्ञान, न्याय, धर्मशास्त्र और अद्वैत वेदान्त में शास्त्री और आचार्य पढ़ाए जाते हैं, तथा संस्कृत उच्च शोध केंद्र और पांडुलिपि संसाधन केंद्र कार्यरत हैं।
- साहित्य
- आचार्य
- ज्योतिष
- वेद
विश्वविद्यालयश्री सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय, वेरावल
Veraval, Gujarat · स्थापना 2005
सोमनाथ के निकट वेरावल स्थित गुजरात का संस्कृत विश्वविद्यालय, जिसकी स्थापना 2005 में पारंपरिक पद्धति से संस्कृत और वैदिक अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए हुई। यहाँ वेद, व्याकरण, साहित्य, दर्शन, ज्योतिष और पुराण विभाग हैं, और दूरस्थ शिक्षा में ज्योतिष, वास्तुशास्त्र और मंदिर प्रबंधन के डिप्लोमा उपलब्ध हैं।
- साहित्य
- आचार्य
- ज्योतिष
- वेद
विश्वविद्यालयश्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
New Delhi, Delhi · स्थापना 1962
नई दिल्ली स्थित संस्कृत अध्ययन का केंद्रीय विश्वविद्यालय। इसका आरंभ विजयादशमी, 8 अक्टूबर 1962 को स्थापित एक संस्कृत विद्यापीठ के रूप में हुआ, जिसकी संस्था के संस्थापक अध्यक्ष प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री थे; 30 अप्रैल 2020 से यह केंद्रीय विश्वविद्यालय है। यहाँ शास्त्री, आचार्य, शिक्षाशास्त्री (बी.एड.) और पीएच.डी. पाठ्यक्रम हैं, जिनमें फलित व सिद्धान्त ज्योतिष, वास्तुशास्त्र और पौरोहित्य भी शामिल हैं।
- साहित्य
- आचार्य
- ज्योतिष
- वेद
विश्वविद्यालयश्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, कालडी
Kalady, Kerala · स्थापना 1993
केरल का संस्कृत विश्वविद्यालय, जिसकी स्थापना 1993 में पेरियार नदी के तट पर आदि शंकराचार्य की जन्मभूमि कालडी में हुई। संस्कृत साहित्य, व्याकरण, वेदान्त और न्याय विभागों के साथ यहाँ आयुर्वेद, भारतीय दर्शन, भाषाएँ और ललित कलाएँ भी पढ़ाई जाती हैं, और केरल भर में इसके आठ क्षेत्रीय परिसर हैं।
- साहित्य
- व्याकरण
- दर्शन
- भारतीय संस्कृति
विश्वविद्यालयश्री वेंकटेश्वर वैदिक विश्वविद्यालय, तिरुपति
Tirupati, Andhra Pradesh
तिरुपति का एक विश्वविद्यालय जो स्वयं वेदों को समर्पित है: इसके संकायों में ऋग्वेद, कृष्ण यजुर्वेद, सामवेद (राणायनीय) और अथर्ववेद (शौनक) की पाठ परंपराएँ, वेदभाष्य, वैखानस आगम, पारस्कर पौरोहित्य, तथा कल्प, निरुक्त और मीमांसा जैसे वेदांग शामिल हैं।
- वेद
- कर्मकांड
- दर्शन
महाविद्यालयद मद्रास संस्कृत कॉलेज, चेन्नई
Chennai, Tamil Nadu · स्थापना 1 February 1906
चेन्नई के मायलापुर में स्थित पारंपरिक संस्कृत महाविद्यालय, जिसकी स्थापना 1906 में वी. कृष्णस्वामी अय्यर ने की और जो मद्रास विश्वविद्यालय से सम्बद्ध है। यहाँ सात वर्ष का संस्कृत शिरोमणि पाठ्यक्रम — प्राक्-शिरोमणि से बी.ए. और एम.ए. तक — मीमांसा, वेदान्त, व्याकरण, न्याय, साहित्य या ज्योतिष में विशेषज्ञता के साथ पढ़ाया जाता है।
- साहित्य
- व्याकरण
- दर्शन
- ज्योतिष
विश्वविद्यालयद संस्कृत कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी, कोलकाता
Kolkata, West Bengal · स्थापना 1824
1824 में स्थापित कोलकाता का संस्कृत कॉलेज, जिसके प्राचार्य कभी ईश्वरचंद्र विद्यासागर थे, 15 जून 2016 को राज्य विश्वविद्यालय बना। संस्कृत, पालि और दर्शन में ऑनर्स व एम.ए. के साथ यह साहित्य, पाणिनि (व्याकरण) और अद्वैत वेदान्त में शास्त्री पाठ्यक्रमों के माध्यम से पारंपरिक टोल शिक्षा को जीवित रखे हुए है।
- साहित्य
- व्याकरण
- दर्शन
- भारतीय संस्कृति
विश्वविद्यालयपतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार
Haridwar, Uttarakhand · स्थापना 2006
पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार में 2006 में स्थापित, यूजीसी (धारा 2(f)) से मान्य और नैक-प्रत्यायित विश्वविद्यालय। अपने बड़े योग विज्ञान विभाग के साथ यह बी.ए., एम.ए. और पीएच.डी. स्तर पर संस्कृत, व्याकरण, दर्शन और वेद पढ़ाता है, और इन पारंपरिक विषयों के छात्रों को शुल्क में छूट देता है।
- योग
- साहित्य
- व्याकरण
- दर्शन
विश्वविद्यालयउत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार
Haridwar, Uttarakhand · स्थापना 21 April 2005
हरिद्वार स्थित उत्तराखण्ड का राज्य संस्कृत विश्वविद्यालय, जिसकी स्थापना 21 अप्रैल 2005 को हुई। यह व्यावहारिक पारंपरिक विषयों के लिए उल्लेखनीय है: फलित ज्योतिष, शुक्ल यजुर्वेद, साहित्य, व्याकरण और योग में एम.ए., तथा ज्योतिष, वास्तुशास्त्र और कर्मकाण्ड एवं पौरोहित्य में पीजी डिप्लोमा।
- साहित्य
- आचार्य
- ज्योतिष
- वेद
विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शिका
पारंपरिक संस्कृत उपाधियों के अपने नाम हैं। यहाँ जानिए उनका अर्थ, प्रवेश की योग्यता और आगे के अवसर। नियम हर वर्ष बदलते हैं — हमेशा संस्थान की वेबसाइट पर पुष्टि करें।
उपाधियों का अर्थ
| पारंपरिक नाम | समकक्ष | अवधि |
|---|---|---|
| प्राक्शास्त्री / उत्तर मध्यमा | कक्षा 12 (10+2) स्तर | विद्यालय स्तर |
| शास्त्री | बी.ए. (स्नातक) | 3 वर्ष, या ऑनर्स / एनईपी में 4 वर्ष |
| आचार्य | एम.ए. (स्नातकोत्तर) | 2 वर्ष |
| शिक्षाशास्त्री | बी.एड. | 2 वर्ष |
| शिक्षाचार्य | एम.एड. | 2 वर्ष |
| विद्यावारिधि | पीएच.डी. (शोध उपाधि) | शोध उपाधि |
नामों में थोड़ा अंतर रहता है: कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय अपनी ऑनर्स उपाधि को सन्मानित शास्त्री कहता है, और कुछ विश्वविद्यालय इसे सास्त्री लिखते हैं।
प्रवेश की योग्यता
›क्या 12वीं के बाद सीधे शास्त्री में प्रवेश मिल सकता है?
हाँ। 12वीं (10+2) या उत्तर मध्यमा / प्राक्शास्त्री जैसी समकक्ष पारंपरिक परीक्षा उत्तीर्ण विद्यार्थी शास्त्री में प्रवेश ले सकते हैं। शर्तें अलग-अलग हैं: श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय 40% अंक माँगता है, जबकि बीएचयू 50% अंकों के साथ संस्कृत को एक विषय के रूप में अनिवार्य करता है। कुछ विश्वविद्यालयों में आयु सीमा भी है — एसएलबीएस में 25 वर्ष, बीएचयू में 2025 के लिए 22 वर्ष।
›आचार्य के लिए क्या योग्यता चाहिए?
किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से शास्त्री, या संस्कृत सहित बी.ए. — उदाहरण के लिए श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का यही नियम है।
›क्या प्रवेश परीक्षा होती है?
केंद्रीय विश्वविद्यालयों में कई पाठ्यक्रमों में प्रवेश एनटीए की कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) से होता है — उदाहरण के लिए बीएचयू का शास्त्री CUET-UG से भरा जाता है। राज्य विश्वविद्यालय प्रायः अपनी प्रवेश प्रक्रिया चलाते हैं, इसलिए हर संस्थान की सूचना देखें।
›मैंने विद्यालय में संस्कृत नहीं पढ़ी। क्या मैं फिर भी ज्योतिष पढ़ सकता/सकती हूँ?
संभव है। शास्त्री–आचार्य मार्ग के अलावा कुछ विश्वविद्यालय ज्योतिष की अलग उपाधियाँ देते हैं — जैसे गुरुकुल कांगड़ी का ज्योतिर्विज्ञान एवं वैदिक कर्मकाण्ड में एम.ए., और कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय का वेदांग ज्योतिष में बी.ए. व एम.ए.। नियम बदलते भी हैं: सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय ने 2024–25 में शास्त्री प्रवेश हेतु संस्कृत विषय की अनिवार्यता शिथिल की थी। हमेशा वर्तमान प्रॉस्पेक्टस देखें।
इन अध्ययनों के बाद अवसर
अध्यापन
शिक्षाशास्त्री (बी.एड.) विद्यालयों के लिए संस्कृत शिक्षक तैयार करता है। महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में अध्यापन के लिए सामान्यतः आचार्य के साथ यूजीसी-नेट या विद्यावारिधि (पीएच.डी.) आवश्यक होती है।
ज्योतिष एवं वास्तु
सिद्धान्त या फलित ज्योतिष और वास्तुशास्त्र के स्नातक परामर्शदाता, पंचांगकार और शोधकर्ता के रूप में कार्य करते हैं — बीएचयू का संकाय स्वयं 1926 से विश्वपंचांग बनाता आ रहा है।
कर्मकाण्ड एवं पौरोहित्य
प्रशिक्षित पुरोहित संस्कार, यज्ञ और मंदिर पूजा करवाते हैं। एसएलबीएस का पौरोहित्य और गुरुकुल कांगड़ी का वैदिक पौरोहित्य-कर्मकाण्ड जैसे पाठ्यक्रम अनुष्ठान उनके अर्थ सहित विधिवत सिखाते हैं।
शोध एवं पांडुलिपि
सम्पूर्णानन्द के सरस्वती भवन जैसे पुस्तकालयों में पांडुलिपियों का संपादन, अनुवाद और सूचीकरण, तथा विद्यावारिधि के माध्यम से शोध।
योग
योगिक साइंस में बी.एससी. से लेकर योग थेरेपी में एम.एससी. तक की उपाधियाँ योग शिक्षक और योग चिकित्सक बनने का मार्ग खोलती हैं।
संस्कृत एवं प्रौद्योगिकी
एक नया मार्ग: राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय कंप्यूटर साइंस एवं संस्कृत भाषा प्रौद्योगिकी में एम.एससी. और केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय संस्कृत सहित एआई एवं डेटा साइंस में बी.टेक. कराता है।
इन विषयों के मूल ऋषि
सभी ऋषि-मुनि →इन संस्थानों में पढ़ाया जाने वाला हर शास्त्र किसी ऋषि या आचार्य से जुड़ा है। उनके बारे में हमारे ऋषि-मुनि विभाग में और पढ़ें।
- वेदव्यासवेद एवं पुराणवेद का चार भागों में विभाजन; महाभारत
- याज्ञवल्क्यशुक्ल यजुर्वेदशुक्ल यजुर्वेद के द्रष्टा; बृहदारण्यक उपनिषद
- पाणिनिव्याकरणअष्टाध्यायी — संस्कृत व्याकरण का आधार
- पराशरज्योतिषबृहत्पराशर होराशास्त्र उन्हीं का माना जाता है
- वराहमिहिरज्योतिष एवं खगोलबृहत्संहिता और पञ्चसिद्धान्तिका
- जैमिनिमीमांसामीमांसा सूत्र
- कपिलसांख्यसांख्य दर्शन के प्रवर्तक
- कणादवैशेषिकवैशेषिक दर्शन के प्रवर्तक
- पतंजलियोगयोगसूत्र
ज्योतिष के विद्यार्थियों के लिए: आज का पंचांग
हमारे लाइव पंचांग से तिथि, नक्षत्र, योग और करण पढ़ने का अभ्यास करें — अपना शहर चुनें।
आज का पंचांग
नई दिल्ली, भारत
दिनांक11 अक्टूबर 2026
वाररविवार
हिंदू वर्षविक्रम संवत् 2083
हिंदू माहआश्विन
सूर्योदय6:19 am
सूर्यास्त5:55 pm
तिथिशुक्ल पक्ष प्रतिपदा (9:31 pm तक)
नक्षत्रचित्रा (10:32 pm तक)
योगवैधृति (9:05 pm तक)
करणकिंस्तुघ्न (9:21 am तक)
अभिजीत मुहूर्त11:44 am – 12:30 pm
राहु काल4:28 pm – 5:55 pm
समय IST में, चुने गए शहर के सूर्योदय से गणना। तिथि, नक्षत्र, योग और करण सूर्योदय के समय के हैं, साथ में उनके समाप्त होने का समय।
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