केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
Central Sanskrit University, New Delhi

- स्थापना
- 1970
- प्रकार
- विश्वविद्यालय
- स्थान
- New Delhi, Delhi
परिचय
यह स्वयं को विश्व का सबसे बड़ा और एकमात्र बहु-परिसरीय भाषा विश्वविद्यालय बताता है। इसका आरंभ 1970 में राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के रूप में हुआ, 2002 में यह मानद विश्वविद्यालय और 2020 में केंद्रीय विश्वविद्यालय बना। जम्मू और कांगड़ा से लेकर पुरी, शृंगेरी और गुरुवायूर तक फैले इसके परिसरों में विद्यालय स्तर से लेकर शास्त्री, आचार्य और विद्यावारिधि (पीएच.डी.) तक संस्कृत पढ़ाई जाती है, जिसमें साहित्य, व्याकरण और ज्योतिष जैसे विषय शामिल हैं।
पाठ्यक्रम एवं अध्ययन क्षेत्र
- प्राक्शास्त्री (इंटरमीडिएट स्तर) — परिसरों में
- शास्त्री (बी.ए. के समकक्ष)
- आचार्य (एम.ए. के समकक्ष)
- विद्यावारिधि (पीएच.डी.)
- शिक्षाशास्त्री (बी.एड.)
- परिसरों में पढ़ाए जाने वाले विषयों में साहित्य, व्याकरण, ज्योतिष और जैन दर्शन शामिल हैं
इतिहास
संस्कृत आयोग से संस्थान तक
संस्कृत आयोग (1956–57) की अनुशंसाओं पर भारत सरकार ने एक केन्द्रीय संस्कृत बोर्ड का गठन किया, जिसने संस्कृत के लिए एक राष्ट्रीय संस्थान की अनुशंसा की। तदनुसार 15 अक्टूबर 1970 को राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान की स्थापना एक स्वायत्त, पूर्णतः सरकार-वित्तपोषित संस्था के रूप में हुई, जिसका उद्देश्य देश-विदेश में संस्कृत का विकास और प्रसार था।
परिसरों का विस्तार
आगामी दशकों में संस्थान ने देश भर में परिसर स्थापित किए, जहाँ कक्षा 6 से लेकर शास्त्री (स्नातक), आचार्य (स्नातकोत्तर) और विद्यावारिधि (पीएच.डी.) तक संस्कृत पढ़ाई जाती थी। इनमें से दो — नई दिल्ली का लाल बहादुर शास्त्री केन्द्रीय संस्कृत विद्यापीठ और तिरुपति का केन्द्रीय संस्कृत विद्यापीठ — आगे चलकर स्वयं मानद विश्वविद्यालय बने। 2002 में संस्थान को भी, उसके परिसरों सहित, मानद विश्वविद्यालय घोषित किया गया।
केंद्रीय विश्वविद्यालय (2020)
16 मार्च 2020 को संसद ने केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय अधिनियम, 2020 पारित किया, जिसके अंतर्गत संस्थान और वे दोनों पूर्व परिसर केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय बने। आज इसके परिसर हैं: श्री महाराजा रणबीर सिंह परिसर (जम्मू), जयपुर, वेदव्यास परिसर (बलाहर, कांगड़ा), एकलव्य परिसर (अगरतला), श्री सदाशिव परिसर (पुरी), लखनऊ, भोपाल, श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर (देवप्रयाग), गंगानाथ झा परिसर (प्रयागराज), गुरुवायूर परिसर (त्रिशूर), राजीव गांधी परिसर (शृंगेरी) और नासिक।
