मुहूर्त
शुभ समय का चुनाव — विवाह, संस्कार, नया घर, वाहन या व्यापार के लिए, और चौघड़िया, राहु काल व अभिजित जैसे दैनिक समय।
आज का पंचांग
नई दिल्ली, भारत
दिनांक12 अक्टूबर 2026
वारसोमवार
हिंदू वर्षविक्रम संवत् 2083
हिंदू माहआश्विन
सूर्योदय6:20 am
सूर्यास्त5:54 pm
तिथिशुक्ल पक्ष द्वितीया (10:13 pm तक)
नक्षत्रस्वाति (11:52 pm तक)
योगविष्कम्भ (8:31 pm तक)
करणबालव (9:48 am तक)
अभिजीत मुहूर्त11:44 am – 12:30 pm
राहु काल7:46 am – 9:13 am
समय IST में, चुने गए शहर के सूर्योदय से गणना। तिथि, नक्षत्र, योग और करण सूर्योदय के समय के हैं, साथ में उनके समाप्त होने का समय।
संस्कार मुहूर्त — जीवन के संस्कार
विवाह, और शिशु के नामकरण, मुंडन तथा अन्नप्राशन के लिए शुभ दिन का चुनाव।
विवाह मुहूर्त: शादी की शुभ तिथि कैसे निकाली जाती है
विवाह मुहूर्त केवल कैलेंडर की कोई 'अच्छी तारीख' नहीं है। यह अनुकूल मास, नक्षत्र, तिथि और लग्न का वह संयोग है जिसमें वर-वधू की अपनी कुंडली में गुरु, सूर्य और चंद्रमा का बल भी देखा जाता है — इसीलिए एक ही महीने में दो जोड़ों को अलग-अलग तिथियाँ मिल सकती हैं।
और पढ़ें →मुहूर्तनामकरण मुहूर्त: शिशु का नाम कब और कैसे रखें
नामकरण संस्कार परंपरागत रूप से जन्म के दसवें या बारहवें दिन, सूतक समाप्त होने पर किया जाता है। नाम का पहला अक्षर प्रायः शिशु के जन्म-नक्षत्र से लिया जाता है — यह कैसे होता है, और दिन कैसे चुनें, यहाँ जानिए।
और पढ़ें →मुहूर्तमुंडन मुहूर्त: चूड़ाकर्म संस्कार कब और कैसे
मुंडन या चूड़ाकर्म शिशु के पहली बार विधिपूर्वक बाल उतारने का संस्कार है। मनुस्मृति इसे पहले या तीसरे वर्ष में बताती है, और अधिकांश परिवार आज भी विषम वर्ष, शुभ नक्षत्र और प्रायः किसी तीर्थ या कुलदेवता के मंदिर को चुनते हैं।
और पढ़ें →मुहूर्तअन्नप्राशन मुहूर्त: शिशु का पहला अन्न
अन्नप्राशन शिशु को पहली बार अन्न खिलाने का संस्कार है, जो छठे मास में बताया गया है। परिवार प्रायः लड़कों के लिए सम मास और लड़कियों के लिए विषम मास, शुभ तिथि और नक्षत्र चुनते हैं — और प्रायः चाँदी के चम्मच से खीर खिलाते हैं।
और पढ़ें →घर, संपत्ति और ख़रीदारी
नए घर में प्रवेश, भूमि पूजन, वाहन की ख़रीद और व्यापार का आरंभ।
गृह प्रवेश मुहूर्त: नए घर में प्रवेश
गृह प्रवेश घर में पहला विधिवत प्रवेश है। इसका मुहूर्त इस पर निर्भर करता है कि प्रवेश तीन में से किस प्रकार का है — बिल्कुल नया घर, लंबे प्रवास के बाद लौटना, या मरम्मत अथवा आपदा के बाद लौटना — और मास, नक्षत्र तथा तिथि पर।
और पढ़ें →मुहूर्तभूमि पूजन और संपत्ति मुहूर्त: भूमि, नींव और ख़रीद
पहली कुदाल ज़मीन में जाने से पहले हिंदू परंपरा पृथ्वी और वास्तु पुरुष की पूजा कर निर्माण की अनुमति माँगती है। भूमि पूजन, शिलान्यास और संपत्ति की रजिस्ट्री का मुहूर्त कैसे चुना जाता है और इस विधि में क्या होता है, यहाँ जानिए।
और पढ़ें →मुहूर्तवाहन ख़रीद मुहूर्त: कार, बाइक या नया वाहन
वाहन के लिए परंपरा 'चर' नक्षत्रों को श्रेष्ठ मानती है — जो चलने वाली वस्तु के अनुरूप हैं — साथ ही पुष्य नक्षत्र, धनतेरस, अक्षय तृतीया और नवरात्रि को। दिन और समय कैसे चुनें, क्या टालें, और पहली वाहन पूजा कैसे करें, यहाँ जानिए।
और पढ़ें →मुहूर्तव्यापार आरंभ मुहूर्त: दुकान, दफ़्तर या नया व्यवसाय
नया व्यापार, दुकान का उद्घाटन या कोई बड़ा सौदा परंपरा से बुध और गुरु के वार, पुष्य व हस्त जैसे क्षिप्र नक्षत्र, और लाभ या अमृत चौघड़िया में किया जाता है — और बहुत-से व्यापारी आज भी दीपावली पर नए बही-खाते खोलते हैं।
और पढ़ें →दैनिक मुहूर्त — दिन के शुभ-अशुभ समय
हर दिन के भीतर के समय: चौघड़िया, राहु काल, अभिजित और ब्रह्म मुहूर्त।
चौघड़िया: दिन के शुभ और अशुभ समय को पढ़ना
चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है, जिनके नाम हैं अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, रोग और काल। यह पश्चिम भारत का त्वरित, व्यावहारिक मुहूर्त है — जब पूरा मुहूर्त निकालने का समय न हो, तब यात्रा, ख़रीद या व्यापार के काम के लिए इसका उपयोग होता है।
और पढ़ें →मुहूर्तराहु काल: नए आरंभ से बचने का दैनिक समय
राहु काल हर दिन का लगभग डेढ़ घंटे का वह भाग है जो छाया ग्रह राहु को सौंपा गया है, और जिसमें परंपरा से नए कार्य आरंभ नहीं किए जाते। दिन में इसका स्थान वार पर निर्भर करता है — सोमवार को सुबह जल्दी, रविवार को दोपहर बाद — और घड़ी का सटीक समय आपके शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त पर।
और पढ़ें →मुहूर्तअभिजित मुहूर्त: दोपहर का विजयी समय
अभिजित दिन के पंद्रह मुहूर्तों में आठवाँ है — स्थानीय मध्याह्न के आस-पास लगभग 48 मिनट का समय। इसके नाम का अर्थ है 'विजयी', और यह वह दैनिक मुहूर्त है जिसे परंपरा इतना बलवान मानती है कि जिस दिन कोई और शुभ समय न हो, उस दिन भी यह काम आ जाता है।
और पढ़ें →मुहूर्तब्रह्म मुहूर्त: भोर से पहले का समय
ब्रह्म मुहूर्त वह मुहूर्त है जो सूर्योदय से लगभग 48 मिनट पहले समाप्त होता है — भारत के अधिकांश भागों में मोटे तौर पर सुबह 4:30 से 5:20 तक। आयुर्वेद इसमें उठने की सलाह देता है, और योग व भक्ति परंपराएँ इसे प्रार्थना, जप, ध्यान और अध्ययन के लिए पूरे दिन का सर्वश्रेष्ठ समय मानती हैं।
और पढ़ें →वर्जित काल, और बिना मुहूर्त के शुभ दिन
भद्रा, पंचक, खरमास और चातुर्मास — और वे अबूझ दिन जो स्वयं में शुभ हैं।
भद्रा काल: राखी और होलिका दहन इसके समाप्त होने की प्रतीक्षा क्यों करते हैं
भद्रा पंचांग में विष्टि करण का नाम है — आधी तिथि का वह भाग जो हर चंद्र मास में आठ बार आता है और शुभ आरंभ के लिए अनुपयुक्त माना जाता है। किसी दिन यह कितना महत्व रखता है, यह इस पर निर्भर है कि भद्रा का 'वास' कहाँ है — पृथ्वी, स्वर्ग या पाताल — जो चंद्रमा की राशि से देखा जाता है।
और पढ़ें →मुहूर्तपंचक: पाँच नक्षत्र और इनमें क्या न करें
पंचक हर महीने के वे लगभग पाँच दिन हैं जब चंद्रमा धनिष्ठा से रेवती तक के अंतिम पाँच नक्षत्रों से गुज़रता है। परंपरा इसमें कुछ निश्चित कामों पर रोक लगाती है — छत डालना, दक्षिण की यात्रा, लकड़ी इकट्ठा करना, पलंग बनवाना — और हर पंचक का नाम उस वार से रखती है जिस दिन वह आरंभ होता है।
और पढ़ें →मुहूर्तखरमास, चातुर्मास और होलाष्टक: जब शुभ कार्य रुक जाते हैं
हिंदू वर्ष के कई काल विवाह, गृह प्रवेश और अन्य नए आरंभों से अलग रखे जाते हैं — वर्ष में दो बार खरमास, चातुर्मास के चार मास, होलाष्टक के आठ दिन, और गुरु या शुक्र का अस्त होना। ये कब पड़ते हैं, क्यों, और इनमें क्या करना फिर भी शुभ है, यहाँ जानिए।
और पढ़ें →मुहूर्तअबूझ मुहूर्त: वे दिन जिनके लिए गणना की आवश्यकता नहीं
अबूझ ('बिना पूछे') मुहूर्त वह दिन है जो स्वयं में शुभ माना जाता है — अक्षय तृतीया, वसंत पंचमी, देवउठनी एकादशी, विजयादशमी और कुछ अन्य — जिस दिन पंचांग देखे बिना विवाह, गृह प्रवेश या नया काम आरंभ किया जा सकता है। यहाँ मुख्य अबूझ मुहूर्त हैं, साथ ही पुष्य और सिद्धि योग।
और पढ़ें →मुहूर्त क्या है
मुहूर्त पहले समय की एक इकाई था: दिन और रात को लगभग 48 मिनट के तीस मुहूर्तों में बाँटा गया था, और हर एक का अपना नाम और स्वभाव था। समय के साथ इस शब्द का अर्थ उचित क्षण हो गया — ऐसा समय जिसमें पंचांग के पाँचों अंग (तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण) और ग्रह, आरंभ किए जा रहे कार्य के अनुकूल हों।
मुहूर्त कैसे चुना जाता है
इस पृष्ठ का हर मुहूर्त एक ही तर्क पर चलता है। पहले उन कालों को अलग करें जिनमें कोई कार्य होता ही नहीं — खरमास, चातुर्मास और होलाष्टक, भद्रा, और कुछ कार्यों के लिए पंचक। फिर नक्षत्र के स्वभाव को कार्य के स्वभाव से मिलाएँ: घर के लिए स्थिर नक्षत्र, वाहन के लिए चर, व्यापार के लिए क्षिप्र। अंत में समय चुनें — बड़े संस्कारों के लिए लग्न, या रोज़ के आरंभ के लिए राहु काल से बाहर कोई अच्छा चौघड़िया।
इन मार्गदर्शिकाओं का सही उपयोग
पंचांग की परंपराएँ क्षेत्र के अनुसार बदलती हैं, और समय आपके शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त पर निर्भर करता है, इसलिए इन मार्गदर्शिकाओं को नियमों की व्याख्या मानें और सटीक तिथियाँ अपने पंचांग या कुल-पुरोहित से मिलाएँ। और जब कोई मुहूर्त न मिले, तो अबूझ मुहूर्त के दिन सदा उपलब्ध हैं।
