भूमि की पूजा पहले क्यों
हिंदू दृष्टि में पृथ्वी कोई निर्जीव संपत्ति नहीं, बल्कि भूदेवी हैं, और हर भूखंड के अधिष्ठाता हैं वास्तु पुरुष, जिनके बारे में वास्तु ग्रंथ कहते हैं कि वे भूखंड पर औंधे लेटे हैं और उनका सिर ईशान कोण में है। खुदाई, समतलीकरण और निर्माण दोनों को विचलित करते हैं, इसलिए निर्माण का आरंभ उनके सम्मान और एक शांत, स्थायी घर की प्रार्थना से होता है। यही भूमि पूजन का उद्देश्य है।
तीन क्षण जिनके लिए मुहूर्त चाहिए
- भूमि पूजन — भूखंड की पूजा और पहली खुदाई (खनन)।
- शिलान्यास — नींव का पत्थर रखना, प्रायः अलग दिन।
- ख़रीद या रजिस्ट्री — ज़मीन या फ़्लैट का बैनामा या बयाना।
दिन कैसे चुना जाता है
- नक्षत्र: जो पीढ़ियों तक खड़ा रहे, उसके लिए ध्रुव (स्थिर) नक्षत्र — रोहिणी, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद — पहली पसंद हैं, फिर मृदु नक्षत्र (मृगशिरा, चित्रा, अनुराधा, रेवती)। संपत्ति ख़रीदने के लिए पुष्य नक्षत्र बहुत प्रचलित है।
- तिथि: शुक्ल पक्ष श्रेष्ठ; रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) और अमावस्या वर्जित।
- वार: सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार। निर्माण के लिए मंगलवार टाला जाता है, यद्यपि कुछ परंपराएँ भूमि ख़रीदने के लिए मंगलवार को ठीक मानती हैं क्योंकि मंगल भूमि का कारक है। इसमें अपने कुल-पुरोहित की बात मानें।
- टालें: खरमास, निर्माण आरंभ के लिए चातुर्मास, पंचक (विशेषकर छत डालने के लिए — पंचक में छत डालना बड़ा निषेध है), भद्रा और राहु काल।
खुदाई कहाँ से शुरू करें
सबसे प्रचलित परंपरा है ईशान (उत्तर-पूर्व) कोण से आरंभ करना — वास्तु पुरुष का सिर, और जल व देवत्व की दिशा। पारंपरिक ग्रंथों में राहु-मुख या शेषनाग विचार भी बताया गया है — हर सौर मास में ब्रह्मांडीय सर्प का मुख किस दिशा में है — जिससे तय होता है कि पहला प्रहार कहाँ हो; पुरोहित चुनी हुई तिथि के लिए इसकी गणना कर सकते हैं।
विधि
- भूखंड साफ़ किया जाता है और पूजा का स्थान, प्रायः ईशान कोण में, चिह्नित किया जाता है।
- गणेश पूजन, कलश स्थापना, भूदेवी, वास्तु पुरुष, नवग्रह और आठों दिक्पालों की पूजा।
- गृहस्वामी पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके लाल कपड़े में लिपटी कुदाल से पहला प्रहार करते हैं।
- नींव के गड्ढे में ताँबे या चाँदी का नाग, कलश, सिक्के, पंचरत्न या अनाज, और कभी-कभी कछुए की छोटी आकृति रखी जाती है — पुराणों के अनुसार शेषनाग और कूर्म ही पृथ्वी को धारण करते हैं। उनके ऊपर पहली ईंट या शिला रखी जाती है।
- नारियल फोड़ा जाता है, प्रसाद बँटता है, और कारीगरों-मज़दूरों का सम्मान कर उन्हें भोजन कराया जाता है — यह चरण छोड़ना नहीं चाहिए।
फ़्लैट ख़रीदने वालों के लिए
फ़्लैट ख़रीदने में खोदने को कोई ज़मीन नहीं होती। परिवार प्रायः बयाना या रजिस्ट्री के लिए शुभ मुहूर्त लेते हैं, और पूरी वास्तु शांति गृह प्रवेश के लिए रखते हैं।
