Bhakti Arohan
ॐ

अभिजित मुहूर्तदोपहर का विजयी समय

अभिजित दिन के पंद्रह मुहूर्तों में आठवाँ है — स्थानीय मध्याह्न के आस-पास लगभग 48 मिनट का समय। इसके नाम का अर्थ है 'विजयी', और यह वह दैनिक मुहूर्त है जिसे परंपरा इतना बलवान मानती है कि जिस दिन कोई और शुभ समय न हो, उस दिन भी यह काम आ जाता है।

आज का पंचांग

नई दिल्ली, भारत

दिनांक12 अक्टूबर 2026

वारसोमवार

हिंदू वर्षविक्रम संवत् 2083

हिंदू माहआश्विन

सूर्योदय6:20 am

सूर्यास्त5:54 pm

तिथिशुक्ल पक्ष द्वितीया (10:13 pm तक)

नक्षत्रस्वाति (11:52 pm तक)

योगविष्कम्भ (8:31 pm तक)

करणबालव (9:48 am तक)

अभिजीत मुहूर्त11:44 am – 12:30 pm

राहु काल7:46 am – 9:13 am

समय IST में, चुने गए शहर के सूर्योदय से गणना। तिथि, नक्षत्र, योग और करण सूर्योदय के समय के हैं, साथ में उनके समाप्त होने का समय।

समय की इकाई के रूप में मुहूर्त

"मुहूर्त" का अर्थ "शुभ क्षण" होने से पहले यह समय की एक इकाई था। प्राचीन भारत में दिन-रात को 30 मुहूर्तों में बाँटा गया था — पंद्रह दिन के और पंद्रह रात के — और हर मुहूर्त दो घटी, यानी दिन-रात बराबर होने पर 48 मिनट का होता है। तीसों के अपने नाम और अधिष्ठाता देवता हैं, और दिन का आठवाँ मुहूर्त अभिजित कहलाता है।

पंद्रह में आठवाँ ठीक बीच में पड़ता है, इसलिए अभिजित सदा स्थानीय मध्याह्न पर केंद्रित रहता है — सूर्योदय और सूर्यास्त के ठीक बीच का क्षण, घड़ी के 12:00 नहीं। सूर्योदय 6:20 और सूर्यास्त 6:00 हो तो दिनमान 700 मिनट, हर मुहूर्त लगभग 47 मिनट, और अभिजित लगभग 11:47 से 12:33 तक।

यह इतना बलवान क्यों माना जाता है

"अभिजित" का अर्थ है "विजयी" या "अजेय"। आकाश में यह उज्ज्वल तारे वेगा का भी नाम है, जिसे कभी उत्तराषाढ़ा और श्रवण के बीच 28वें नक्षत्र के रूप में गिना जाता था। मध्याह्न का सूर्य सबसे बलवान होता है, और परंपरा मानती है कि यह समय दिन के पंचांग के कई छोटे दोषों को निष्प्रभावी कर देता है। इसीलिए जब कोई काम बेहतर तिथि की प्रतीक्षा नहीं कर सकता — आवश्यक यात्रा, न्यायालय में कोई आवेदन, कोई दस्तावेज़, कोई पूजा — तो पुरोहित अभिजित की ओर देखते हैं।

परंपरा मध्याह्न को श्रीराम के जन्म से भी जोड़ती है: रामचरितमानस उनके जन्म को मध्य दिवस में बताता है, जब "न बहुत शीत था न धूप", और मंदिरों में रामनवमी का जन्मोत्सव दोपहर बारह बजे मनाया जाता है।

जब अभिजित का उपयोग नहीं होता

  • बुधवार: लगभग सभी परंपराएँ कहती हैं कि बुधवार को अभिजित शुभ नहीं होता।
  • विवाह और गृह प्रवेश: इनके लिए उचित लग्न सहित पूर्ण मुहूर्त चाहिए; अभिजित उसका स्थान नहीं लेता, यद्यपि कुछ पुरोहित सगाई या तिलक के लिए इसका उपयोग करते हैं।
  • दक्षिण दिशा की यात्रा: कुछ ग्रंथ अभिजित में दक्षिण की ओर यात्रा आरंभ करने से मना करते हैं।
  • टकराव: बुधवार को राहु काल ठीक स्थानीय मध्याह्न से आरंभ होकर अभिजित के उत्तरार्ध को घेर लेता है (देखें राहु काल), जो उस दिन अभिजित छोड़ने का एक व्यावहारिक कारण भी है।

दैनिक जीवन में उपयोग

किसी त्वरित दैनिक निर्णय के लिए तीन बातें देखें: क्या यह अभिजित है, क्या आज बुधवार नहीं है, और क्या यह राहु काल और भद्रा से मुक्त है? यदि हाँ, तो दोपहर का यह समय दिन में आरंभ के सबसे अच्छे समयों में है। यदि कोई अच्छा चौघड़िया भी साथ पड़े तो और भी अच्छा।

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