Bhakti Arohan
ॐ

पंचकपाँच नक्षत्र और इनमें क्या न करें

पंचक हर महीने के वे लगभग पाँच दिन हैं जब चंद्रमा धनिष्ठा से रेवती तक के अंतिम पाँच नक्षत्रों से गुज़रता है। परंपरा इसमें कुछ निश्चित कामों पर रोक लगाती है — छत डालना, दक्षिण की यात्रा, लकड़ी इकट्ठा करना, पलंग बनवाना — और हर पंचक का नाम उस वार से रखती है जिस दिन वह आरंभ होता है।

आज का पंचांग

नई दिल्ली, भारत

दिनांक12 अक्टूबर 2026

वारसोमवार

हिंदू वर्षविक्रम संवत् 2083

हिंदू माहआश्विन

सूर्योदय6:20 am

सूर्यास्त5:54 pm

तिथिशुक्ल पक्ष द्वितीया (10:13 pm तक)

नक्षत्रस्वाति (11:52 pm तक)

योगविष्कम्भ (8:31 pm तक)

करणबालव (9:48 am तक)

अभिजीत मुहूर्त11:44 am – 12:30 pm

राहु काल7:46 am – 9:13 am

समय IST में, चुने गए शहर के सूर्योदय से गणना। तिथि, नक्षत्र, योग और करण सूर्योदय के समय के हैं, साथ में उनके समाप्त होने का समय।

पंचक क्या है

"पंचक" का अर्थ है "पाँच का समूह"। ये पाँच हैं राशिचक्र के अंतिम नक्षत्र:

  1. धनिष्ठा — उसका उत्तरार्ध, जो कुंभ राशि में है
  2. शतभिषा
  3. पूर्वाभाद्रपद
  4. उत्तराभाद्रपद
  5. रेवती

सरल शब्दों में, पंचक वह समय है जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में रहता है। चंद्रमा लगभग 27.3 दिनों में राशिचक्र का चक्कर पूरा करता है, इसलिए पंचक हर महीने आता है और पाँच दिन से थोड़ा कम रहता है। पंचांग इसका आरंभ और अंत मिनट तक छापते हैं।

पाँच काम जो न करें

भद्रा या राहु काल के विपरीत, पंचक शुभ कार्यों पर सामान्य प्रतिबंध नहीं है — विवाह और अन्य संस्कार अपने-आप वर्जित नहीं होते। परंपरा कुछ विशेष कामों से बचने को कहती है:

  • छत डालना या किसी निर्माण को पूरा करना — सबसे व्यापक रूप से माना जाने वाला नियम।
  • दक्षिण दिशा की यात्रा, जो यम की दिशा है।
  • लकड़ी, घास या ईंधन इकट्ठा करना — अग्नि-भय से जुड़ा, विशेषकर धनिष्ठा में वर्जित।
  • पलंग या चारपाई बनवाना/बुनना।
  • निर्धारित उपाय के बिना दाह-संस्कार — नीचे देखें।

पंचक के पाँच प्रकार

पंचक का नाम उस वार पर पड़ता है जिस दिन वह आरंभ होता है, और हर नाम की अपनी चेतावनी है:

आरंभ का वारनामपारंपरिक सावधानी
रविवाररोग पंचकस्वास्थ्य; उपचार या कठिन काम आरंभ करने से बचें।
सोमवारराज पंचकअपेक्षाकृत शुभ माना जाता है — सरकारी या संपत्ति के कामों के लिए अच्छा।
मंगलवारअग्नि पंचकअग्नि; निर्माण, मशीनरी और आग से जुड़े काम से बचें।
शुक्रवारचोर पंचकचोरी और हानि; यात्रा और बड़े लेन-देन से बचें।
शनिवारमृत्यु पंचकसबसे गंभीर; जोखिम भरे कामों से पूरी तरह बचें।

बुधवार या गुरुवार से आरंभ होने वाले पंचक का कोई विशेष नाम नहीं है और उसे सामान्यतः हल्का माना जाता है; पाँचों सामान्य प्रतिबंध फिर भी लागू रहते हैं।

पंचक में मृत्यु

यह मान्यता कि पंचक में हुई मृत्यु के बाद परिवार में और मृत्यु हो सकती हैं, पंचक से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध — और सबसे अधिक चिंता देने वाली — मान्यता है। परंपरा अंतिम संस्कार में देरी नहीं करती। इसके स्थान पर वह पंचक शांति का विधान करती है: कुश या आटे के पाँच छोटे पुतले बनाकर शव के साथ उनका दाह किया जाता है, और बाद में शांति कर्म होता है। कुल-पुरोहित अंतिम संस्कार के साथ ही यह व्यवस्था कर देते हैं।

संतुलन बनाए रखें

पंचक हर महीने आता है, इसलिए निर्माण या यात्रा करने वाले परिवार इससे पूरी तरह नहीं बच सकते, और इसके नियम सदा विशिष्ट रहे हैं, सर्वव्यापी नहीं। निर्माण की योजना में छत का लेंटर पंचक के बाहर रखें। अन्य योजनाओं के लिए पंचांग का शुभ दिन और अच्छा चौघड़िया पर्याप्त है — पंचक की सूची को ध्यान में रखते हुए।

संबंधित सामग्री