चौघड़िया क्या है
शब्द का अर्थ है "चार घड़ी"। एक घड़ी (घटिका) 24 मिनट की होती है, इसलिए एक चौघड़िया नाम से 96 मिनट का है। व्यवहार में सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है, और इसी तरह सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक के समय को। दिन की लंबाई वर्ष भर और शहर-शहर बदलती है, इसलिए गर्मियों के लंबे दिन में चौघड़िया लगभग 1 घंटा 40 मिनट का और सर्दियों में लगभग 1 घंटा 20 मिनट का होता है — इसीलिए चौघड़िया का समय सदा अपने शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से निकालना चाहिए।
यह विशेषकर गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के व्यापारी समाज में लोकप्रिय है, जिन्हें दुकान खोलने, माल भेजने या यात्रा पर निकलने के लिए शुभ समय चुनने का कोई त्वरित तरीक़ा चाहिए था।
सात प्रकार
- अमृत (चंद्रमा) — सभी कार्यों के लिए उत्तम।
- शुभ (गुरु) — उत्तम, विशेषकर संस्कार, विवाह और पूजा के लिए।
- लाभ (बुध) — व्यापार, विद्या और नए काम के लिए उत्तम।
- चर (शुक्र) — अच्छा, विशेषकर यात्रा और वाहन के लिए।
- उद्वेग (सूर्य) — नए आरंभ के लिए अशुभ; परंपरा से सरकारी काम के लिए ठीक माना जाता है।
- रोग (मंगल) — अशुभ; कोई महत्वपूर्ण काम आरंभ न करें।
- काल (शनि) — आरंभ के लिए अशुभ।
नीचे की तालिकाओं में मोटे अक्षरों वाले तीन नाम — अमृत, शुभ, लाभ — ही वे हैं जिन्हें लोग खोजते हैं; चर चौथा "अच्छा" चौघड़िया है।
दिन का चौघड़िया (सूर्योदय से सूर्यास्त)
दिन सदा उस वार के अपने ग्रह के चौघड़िया से आरंभ होता है: रविवार उद्वेग (सूर्य) से, सोमवार अमृत (चंद्र) से, इत्यादि। आठवाँ भाग पहले को दोहराता है।
| क्रम | रविवार | सोमवार | मंगलवार | बुधवार | गुरुवार | शुक्रवार | शनिवार |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | उद्वेग | अमृत | रोग | लाभ | शुभ | चर | काल |
| 2 | चर | काल | उद्वेग | अमृत | रोग | लाभ | शुभ |
| 3 | लाभ | शुभ | चर | काल | उद्वेग | अमृत | रोग |
| 4 | अमृत | रोग | लाभ | शुभ | चर | काल | उद्वेग |
| 5 | काल | उद्वेग | अमृत | रोग | लाभ | शुभ | चर |
| 6 | शुभ | चर | काल | उद्वेग | अमृत | रोग | लाभ |
| 7 | रोग | लाभ | शुभ | चर | काल | उद्वेग | अमृत |
| 8 | उद्वेग | अमृत | रोग | लाभ | शुभ | चर | काल |
रात का चौघड़िया (सूर्यास्त से सूर्योदय)
रात का क्रम और आरंभ-बिंदु अलग है, इसलिए इसे दिन की तालिका से नहीं पढ़ा जा सकता। उदाहरण के लिए, रविवार की रात शुभ से आरंभ होती है।
| क्रम | रविवार | सोमवार | मंगलवार | बुधवार | गुरुवार | शुक्रवार | शनिवार |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | शुभ | चर | काल | उद्वेग | अमृत | रोग | लाभ |
| 2 | अमृत | रोग | लाभ | शुभ | चर | काल | उद्वेग |
| 3 | चर | काल | उद्वेग | अमृत | रोग | लाभ | शुभ |
| 4 | रोग | लाभ | शुभ | चर | काल | उद्वेग | अमृत |
| 5 | काल | उद्वेग | अमृत | रोग | लाभ | शुभ | चर |
| 6 | लाभ | शुभ | चर | काल | उद्वेग | अमृत | रोग |
| 7 | उद्वेग | अमृत | रोग | लाभ | शुभ | चर | काल |
| 8 | शुभ | चर | काल | उद्वेग | अमृत | रोग | लाभ |
स्वयं कैसे निकालें
- उस तिथि के लिए अपने शहर का सूर्योदय और सूर्यास्त देखें — मान लीजिए सुबह 6:10 और शाम 5:50।
- दिनमान 11 घंटे 40 मिनट = 700 मिनट; एक चौघड़िया = 700 ÷ 8 = 87.5 मिनट।
- बुधवार को पहला भाग (6:10–7:37) लाभ, दूसरा (7:37–9:05) अमृत, तीसरा काल, और इसी तरह बुधवार के स्तंभ में नीचे की ओर।
अन्य मुहूर्तों के साथ इसका स्थान
चौघड़िया एक त्वरित साधन है, पूर्ण मुहूर्त नहीं। विवाह या गृह प्रवेश के लिए तिथि पंचांग से और समय लग्न से आता है। बहुत-से लोग "अच्छे" चौघड़िया को भी छोड़ देते हैं यदि वह राहु काल से टकराए, और कुछ पंचांग दिन के भीतर काल वेला और वार वेला नाम के अतिरिक्त अशुभ समय भी दिखाते हैं। रोज़ के त्वरित निर्णयों — यात्रा पर कब निकलें, कोई दस्तावेज़ कब हस्ताक्षर करें, ख़रीदारी कब करें — के लिए अधिकांश परिवार अच्छा चौघड़िया ही देखते हैं।
