गुरुकुल कांगड़ी (समविश्वविद्यालय), हरिद्वार
Gurukula Kangri (Deemed to be University), Haridwar

- स्थापना
- 4 March 1902
- प्रकार
- गुरुकुल
- स्थान
- Haridwar, Uttarakhand
परिचय
4 मार्च 1902 को स्वामी श्रद्धानन्द द्वारा हरिद्वार के निकट गंगा तट पर प्राचीन गुरुकुल पद्धति के पुनरुद्धार हेतु स्थापित, और अब यूजीसी द्वारा वित्तपोषित समविश्वविद्यालय। यहाँ आधुनिक विषयों के साथ वेद, संस्कृत और दर्शन पढ़ाए जाते हैं, जिनमें ज्योतिर्विज्ञान एवं वैदिक कर्मकाण्ड में एम.ए. और एक-वर्षीय वैदिक पौरोहित्य-कर्मकाण्ड पाठ्यक्रम भी शामिल हैं।
पाठ्यक्रम एवं अध्ययन क्षेत्र
- वेद, संस्कृत, दर्शन और योगिक विज्ञान में बी.ए. (ऑनर्स); योगिक विज्ञान में बी.एससी. (ऑनर्स)
- एम.ए. वैदिक साहित्य
- एम.ए. संस्कृत
- एम.ए. दर्शनशास्त्र
- एम.ए. ज्योतिर्विज्ञान एवं वैदिक कर्मकाण्ड
- एम.ए. प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व
- एम.ए. योगिक विज्ञान और योगिक विज्ञान में पी.जी. डिप्लोमा
- वैदिक पौरोहित्य-कर्मकाण्ड (एक वर्ष)
- वैदिक साहित्य, संस्कृत साहित्य, दर्शन आदि में पीएच.डी.
इतिहास
गंगा तट पर गुरुकुल (1902)
स्वामी श्रद्धानन्द ने 4 मार्च 1902 को हरिद्वार से लगभग 6 किमी दूर गंगा तट पर गुरुकुल कांगड़ी की स्थापना की, जिसका एकमात्र उद्देश्य प्राचीन भारतीय गुरुकुल शिक्षा पद्धति का पुनरुद्धार था। इसे मैकाले की शिक्षा नीति के स्वदेशी विकल्प के रूप में स्थापित किया गया, जहाँ वैदिक साहित्य, भारतीय दर्शन और भारतीय संस्कृति के साथ आधुनिक विज्ञान और शोध की शिक्षा दी जाती थी।
विस्तार
स्त्री-शिक्षा के प्रति आर्य समाज के सतत समर्थन के अनुरूप आचार्य रामदेव ने 1922 में देहरादून में कन्या गुरुकुल परिसर स्थापित किया, और 1993 में हरिद्वार में कन्या गुरुकुल परिसर बना। 2000 में अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय जोड़ा गया।
वर्षों में महात्मा गांधी, पं. मदन मोहन मालवीय, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, डॉ. एस. राधाकृष्णन और सी. एफ. एंड्रयूज़ जैसे अतिथि यहाँ आए। यह यूजीसी / भारत सरकार द्वारा पूर्णतः वित्तपोषित समविश्वविद्यालय है।
