केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर, देवप्रयाग
Central Sanskrit University, Shri Raghunath Kirti Campus, Devprayag

- स्थापना
- 1908 (as a Mahavidyalaya); campus since 16 June 2016
- प्रकार
- महाविद्यालय
- स्थान
- Devprayag, Uttarakhand
परिचय
भागीरथी और अलकनंदा के संगम पर, जहाँ से गंगा आरंभ होती है, स्थित केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का देवप्रयाग परिसर। यह 1908 में स्थापित श्री रघुनाथ कीर्ति आदर्श संस्कृत महाविद्यालय से विकसित हुआ, और यहाँ व्याकरण, ज्योतिष, साहित्य, वेद और न्याय में प्राक्शास्त्री से आचार्य तक पढ़ाई होती है।
पाठ्यक्रम एवं अध्ययन क्षेत्र
- प्राक्शास्त्री, शास्त्री (बी.ए.), आचार्य (एम.ए.)
- विभाग: व्याकरण, ज्योतिष, साहित्य, वेद, न्याय
- शास्त्री तक आधुनिक विषय: हिन्दी, अंग्रेज़ी, इतिहास, कंप्यूटर विज्ञान
- संस्कृत संभाषण (अनौपचारिक पाठ्यक्रम)
इतिहास
1908 के महाविद्यालय से
1908 में देवप्रयाग में स्थापित श्री रघुनाथ कीर्ति आदर्श संस्कृत महाविद्यालय को 16 जून 2016 को राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान ने अपने 13वें घटक परिसर के रूप में लिया, और अब यह केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का परिसर है। पुराने महाविद्यालय की तरह इसका नाम भी देवप्रयाग के प्राचीन रघुनाथ मंदिर के देवता श्री रघुनाथजी के नाम पर है। पूर्व महाविद्यालय ने अपना 3.443 हेक्टेयर परिसर दान किया, और उत्तराखण्ड सरकार ने 9.228 हेक्टेयर और दिए — कुल लगभग 23 एकड़।
विद्याक्षेत्र देवप्रयाग
स्कन्द पुराण के केदारखण्ड के अनुसार देवप्रयाग का नाम यहाँ तपस्या करने वाले ऋषि देवशर्मा के नाम पर पड़ा। यह उत्तराखण्ड के पाँच प्रयागों में पहला है, और इसका नृसिंहाचल क्षेत्र कभी पूरे क्षेत्र में विद्या के केंद्र — विद्याक्षेत्र — के रूप में प्रसिद्ध था। परिसर पाँच विभागों, लगभग सौ छात्रों और पंद्रह अध्यापकों के साथ आरंभ हुआ, और संस्कृत संभाषण का अनौपचारिक पाठ्यक्रम भी चलाता है।
