देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार
Dev Sanskriti Vishwavidyalaya, Haridwar

- स्थापना
- 2002
- प्रकार
- विश्वविद्यालय
- स्थान
- Haridwar, Uttarakhand
परिचय
शांतिकुंज, हरिद्वार स्थित विश्वविद्यालय, जिसकी स्थापना 2002 में उत्तराखंड विधानसभा के अधिनियम से पं. श्रीराम शर्मा आचार्य और माता भगवती देवी शर्मा के आदर्शों पर हुई। संस्कृत और वैदिक अध्ययन के साथ यह योग शिक्षा के लिए जाना जाता है — बी.एससी. योगिक साइंस से लेकर एम.एससी. योग थेरेपी तक — और यहाँ इतिहास एवं भारतीय संस्कृति में एम.ए. भी उपलब्ध है।
पाठ्यक्रम एवं अध्ययन क्षेत्र
- बी.ए. संस्कृत (ऑनर्स) और एम.ए. संस्कृत
- बी.ए. इतिहास (ऑनर्स) और एम.ए. इतिहास एवं भारतीय संस्कृति
- बी.एससी. योगिक साइंस (ऑनर्स)
- मानव चेतना एवं योगिक साइंस में एम.ए. और एम.एससी.
- एम.एससी. योग थेरेपी
- पीएच.डी. पाठ्यक्रम, वैदिक अध्ययन एवं संस्कृत विभाग सहित
इतिहास
भूमि और संकल्प
विश्वविद्यालय के अनुसार इसकी नींव तब पड़ी जब माता भगवती देवी शर्मा (1926–1994) ने 1990 के श्रद्धांजलि समारोह के दौरान इस भूमि की आध्यात्मिक महत्ता को अनुभव किया। बाद में यह भूमि "देव संस्कृति" के पुनर्जागरण को समर्पित संस्थान के लिए ली गई।
महाविद्यालय से विश्वविद्यालय
23 मई 1999 को भूमि पूजन के बाद निर्माण आरंभ हुआ और देव संस्कृति महाविद्यालय अस्तित्व में आया। 22 जनवरी 2002 को उत्तराखंड विधानसभा द्वारा पारित अधिनियम से यह देव संस्कृति विश्वविद्यालय बना, जिसकी राजपत्र अधिसूचना 11 अप्रैल 2002 को हुई। यह यूजीसी की धारा 2(f) के अंतर्गत मान्यता प्राप्त और नैक (NAAC) से प्रत्यायित है।
विश्वविद्यालय अपने उद्देश्य के लिए संस्थापक-संरक्षक पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के शब्दों को उद्धृत करता है: ऐसी शिक्षा जो विद्यार्थियों को श्रेष्ठ, निःस्वार्थ और करुणामय मनुष्य बनाए।
