श्लोक 21.1
कह लंकेस कवन तैं कीसा। केहि कें बल घालेहि बन खीसा॥
की धौं श्रवन सुनेहि नहिं मोही। देखउँ अति असंक सठ तोही॥ १ ॥
kaha laṁkesa kavana taiṁ kīsā kehi keṁ bala ghālehi bana khīsā
kī dhauṁ śhravana sunehi nahiṁ mohī dekhaum̐ ati asaṁka saṭha tohī
हिंदी अर्थ
लंकापति ने कहा, "अरे बंदर! तू कौन है? किसके बल पर तूने वन उजाड़ डाला? क्या तूने कभी कानों से मेरा नाम नहीं सुना? अरे मूर्ख! मैं तुझे बड़ा निडर देख रहा हूँ।
भावार्थ
रावण के दो प्रश्न, "तू कौन है" और "किसके बल पर", हनुमान जी को बोलने का अवसर देते हैं। वे अपना नाम बताने से पहले दूसरे प्रश्न का विस्तार से उत्तर देते हैं।
श्लोक 21.2
मारे निसिचर केहिं अपराधा। कहु सठ तोहि न प्रान कइ बाधा॥
सुनु रावन ब्रह्मांड निकाया। पाइ जासु बल बिरचति माया॥ २ ॥
māre nisichara kehiṁ aparādhā kahu saṭha tohi na prāna kai bādhā
sunu rāvana brahmāṁḍa nikāyā pāi jāsu bala birachati māyā
हिंदी अर्थ
"किस अपराध से तूने राक्षसों को मारा? बोल मूर्ख, क्या तुझे प्राणों का डर नहीं?" (हनुमान जी बोले) "सुन रावण! जिनका बल पाकर माया अनगिनत ब्रह्मांडों की रचना करती है,
श्लोक 21.3
जाकें बल बिरंचि हरि ईसा। पालत सृजत हरत दससीसा॥
जा बल सीस धरत सहसानन। अंडकोस समेत गिरि कानन॥ ३ ॥
jākeṁ bala biraṁchi hari īsā pālata sṛijata harata dasasīsā
jā bala sīsa dharata sahasānana aṁḍakosa sameta giri kānana
हिंदी अर्थ
"हे दशशीश! जिनके बल से ब्रह्मा, विष्णु और महेश सृष्टि, पालन और संहार करते हैं; जिनके बल से सहस्रमुख शेषनाग पर्वतों और वनों सहित पूरे ब्रह्मांड को सिर पर धारण करते हैं,
भावार्थ
"किसके बल पर" का हनुमान जी का उत्तर अद्भुत विस्तार वाला है: जिस शक्ति के वे सेवक हैं, वही त्रिदेवों के कार्यों का स्रोत है। यह पूरा वचन उस राजा को दिया गया धर्म का पाठ है जो अपने को सर्वोपरि मानता है।
श्लोक 21.4
धरइ जो बिबिध देह सुरत्राता। तुम्ह से सठन्ह सिखावनु दाता॥
हर कोदंड कठिन जेहिं भंजा। तेहि समेत नृप दल मद गंजा॥ ४ ॥
dharai jo bibidha deha suratrātā tumha se saṭhanha sikhāvanu dātā
hara kodaṁḍa kaṭhina jehiṁ bhaṁjā tehi sameta nṛipa dala mada gaṁjā
हिंदी अर्थ
"जो देवताओं की रक्षा के लिए अनेक रूप धारण करते हैं और तुम जैसे मूर्खों को सीख देते हैं; जिन्होंने शिव जी का कठोर धनुष तोड़ा और उसके साथ राजाओं के समूह का घमंड भी चूर किया,
भावार्थ
सीता स्वयंवर में शिव-धनुष टूटने की बात रावण को विशेष रूप से चुभती है, क्योंकि कुछ कथाओं में वह धनुष उठा भी नहीं पाया था।
श्लोक 21.5
खर दूषन त्रिसिरा अरु बाली। बधे सकल अतुलित बलसाली॥ ५ ॥
khara dūṣhana trisirā aru bālī badhe sakala atulita balasālī
हिंदी अर्थ
"जिन्होंने खर, दूषण, त्रिशिरा और बालि जैसे अतुलनीय बलशाली वीरों को मार डाला,
श्लोक 21.6
जाके बल लवलेस तें जितेहु चराचर झारि।
तासु दूत मैं जा करि हरि आनेहु प्रिय नारि॥ २१ ॥
jāke bala lavalesa teṁ jitehu charāchara jhāri
tāsu dūta maiṁ jā kari hari ānehu priya nāri
हिंदी अर्थ
"जिनके बल के लेशमात्र से तुमने समस्त चराचर जगत को जीत लिया, और जिनकी प्रिय पत्नी को तुम हर लाए हो, मैं उन्हीं का दूत हूँ।"
भावार्थ
हनुमान जी सबसे तीखी बात अंत के लिए रखते हैं: रावण की अपनी शक्ति भी राम की ही दी हुई है। उसके बाद ही वे बताते हैं कि वे कौन हैं, केवल "उनका दूत"।