Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 9, श्लोक 30

निशुम्भवध

पुनश्च कृत्वा बाहूनामयुतं दनुजेश्वरः । चक्रायुधेन दितिजश्छादयामास चण्डिकाम् ॥ ३० ॥

punaśhcha kṛitvā bāhūnāmayutaṁ danujeśhvaraḥ chakrāyudhena ditijaśhchhādayāmāsa chaṇḍikām

हिंदी अर्थ

फिर उस दानवराज ने दस हज़ार भुजाएँ बनाकर चक्रों से चण्डिका को ढक दिया।

भावार्थ

दस हज़ार भुजाएँ: असुर भी अपनी शक्ति बढ़ा सकते हैं, पर वह पर्याप्त नहीं होगी।