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ॐ

ॐ दुं दुर्गायै नमः – दुर्गा बीज मंत्र

माँ दुर्गा का बीज मंत्र — बीज "दुं" का अर्थ, "ह्रीं" सहित अष्टाक्षर रूप, नवरात्रि में इसके जप की विधि, और यह नवार्ण मंत्र से कैसे अलग है।

मूल पाठ

दुर्गा बीज मंत्र: ॐ दुं दुर्गायै नमः॥ अष्टाक्षर रूप: ॐ ह्रीं दुं दुर्गायै नमः॥ एकाक्षरी बीज: दुं॥

लिप्यंतरण

Durga beej mantra: Om Dum Durgayai Namah. Eight-syllable form: Om Hreem Dum Durgayai Namah. Single-syllable bija: Dum.

मंत्र का अर्थ

ॐ दुं दुर्गायै नमः — "ॐ, दुं, दुर्गा को नमस्कार।" दुं दुर्गा का अपना बीजाक्षर है, जो अधिकांश बीजों की तरह उनके नाम की पहली ध्वनि और अनुस्वार से बना है। दुर्गायै का अर्थ "दुर्गा को" और नमः "मैं नमन करता हूँ"। यह देवी का सबसे छोटा पूर्ण मंत्र है, और बहुत लोग इसे दुर्गा के दैनिक जप के रूप में प्रयोग करते हैं।

उनका नाम ही बताता है कि उन्हें क्यों पुकारा जाता है: दुर्गा "जिन तक पहुँचना कठिन है" — वह दुर्ग जिसे कोई शत्रु नहीं जीत सकता — और "जो दुर्गति से पार ले जाती हैं"। देवी माहात्म्य के अनुसार दुर्गम असुर का वध करने से उनका नाम दुर्गा पड़ा।

लंबे रूप

  • ॐ ह्रीं दुं दुर्गायै नमः — अष्टाक्षर रूप, जिसमें भुवनेश्वरी और सामान्य रूप से शक्ति का बीज ह्रीं जुड़ता है।
  • दुं — अकेला एकाक्षरी बीज, जिसका प्रयोग उसमें दीक्षित साधक करते हैं।

इसे नवार्ण मंत्र से न मिलाएँ — "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे", दुर्गा सप्तशती परंपरा का चामुण्डा को संबोधित नौ अक्षरों का मंत्र। दोनों दुर्गा मंत्र हैं; नवार्ण परंपरा से दीक्षा के साथ लिया जाता है, जबकि "ॐ दुं दुर्गायै नमः" सामान्यतः सभी जपते हैं।

नवरात्रि में जप कैसे करें

  1. पहले दिन कलश स्थापना के बाद, पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके दुर्गा के चित्र के सामने बैठें, वेदी पर लाल वस्त्र और घी का दीपक रखें (परिवार में परंपरा हो तो अखंड ज्योति)।
  2. लाल फूल — गुड़हल उन्हें सबसे प्रिय है — सिंदूर, अक्षत और थोड़ा मीठा अर्पित करें।
  3. नौ दिन तक प्रतिदिन 108 की एक या अधिक माला जपें, हर दिन समान संख्या रखें। रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला पारंपरिक है।
  4. अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन और उनकी आरती जय अम्बे गौरी से समापन करें।

नवरात्रि के बाहर मंगलवार, शुक्रवार और मासिक दुर्गा अष्टमी सामान्य दिन हैं। देखें हमारा शारदीय नवरात्रि 2026 तिथि और मुहूर्त।

इससे जुड़े पारंपरिक लाभ

  • रक्षा और निर्भयता — दुर्ग रूपी दुर्गा।
  • बाधाओं का निवारण और कठिन परिस्थितियों का सामना करने का साहस।
  • रोग, विवाद या मुकदमे के समय मन की दृढ़ता; ज्योतिष में राहु के कष्ट के समय पारंपरिक रूप से सुझाया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा का बीज मंत्र क्या है?

ॐ दुं दुर्गायै नमः। "दुं" उनका बीजाक्षर है।

क्या ॐ दुं दुर्गायै नमः और नवार्ण मंत्र एक ही हैं?

नहीं। नवार्ण मंत्र "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" है। दोनों दुर्गा मंत्र हैं, पर अलग पाठ हैं और उनके प्रयोग की परंपराएँ अलग हैं।

नवरात्रि में इसका जप कितनी बार करें?

नौ दिन तक प्रतिदिन कम से कम एक माला (108), हर दिन समान संख्या।

क्या ॐ दुं दुर्गायै नमः के लिए दीक्षा चाहिए?

सामान्यतः इसे सभी बिना दीक्षा के जपते हैं। अकेला बीज "दुं" और नवार्ण मंत्र प्रायः गुरु से लिए जाते हैं।

नवरात्रि के बाहर कौन-सा दिन सबसे अच्छा है?

मंगलवार, शुक्रवार और मासिक दुर्गा अष्टमी।

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