
मूल पाठ
नाम मंत्र: ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥ प्रार्थना (ध्यान श्लोक): सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥ स्तुति: या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
लिप्यंतरण
Naam mantra: Om devi siddhidatryai namah || Prarthana (dhyana shloka): Siddha gandharva yakshadyairasurairamarairapi Sevyamana sada bhuyat siddhida siddhidayini || Stuti: Ya devi sarvabhuteshu man siddhidatri rupena sansthita Namastasyai namastasyai namastasyai namo namah ||
माँ सिद्धिदात्री कौन हैं?
माँ सिद्धिदात्री नवदुर्गा — नवरात्रि के नौ दिनों में पूजे जाने वाले माँ दुर्गा के नौ रूपों — में नौवाँ रूप हैं। उनके नाम का अर्थ है "सिद्धियाँ देने वाली" — आध्यात्मिक शक्तियाँ और सिद्धि। शारदीय नवरात्रि 2026 में उनकी पूजा नौवें दिन (नवमी), सोमवार 19 अक्टूबर को होगी।
सिद्धिदात्री नौवाँ और अंतिम रूप हैं, जो हर सिद्धि देती हैं — अणिमा, महिमा जैसी आठ शास्त्रीय सिद्धियाँ, और सबसे बढ़कर आध्यात्मिक लक्ष्य की प्राप्ति। परंपरा मानती है कि स्वयं शिव ने उनकी कृपा से सिद्धियाँ पाईं, और उसी से उनका आधा शरीर देवी का हो गया — वह रूप जो अर्धनारीश्वर कहलाता है।
उनकी प्रार्थना का श्लोक कहता है कि देवता, ऋषि, सिद्ध, गंधर्व और मनुष्य सभी उनकी सेवा करते हैं। नवमी नौ दिनों को पूर्ण करती है: नवरात्रि हवन होता है, कई घरों में कन्या पूजन होता है, और व्रत का पारण होता है।
उनका स्वरूप
वे कमल पर विराजमान हैं और सिंह पर भी सवार हैं; उनकी चार भुजाओं में चक्र, शंख, गदा और कमल हैं।
माँ सिद्धिदात्री के मंत्र
नाम मंत्र: ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥ — माला पर 108 बार जपें।
प्रार्थना (ध्यान श्लोक):
सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
स्तुति:
या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
यह स्तुति देवी माहात्म्य के "या देवी सर्वभूतेषु" स्तोत्र के आधार पर, उनके नाम के साथ है: "जो देवी सब प्राणियों में माँ सिद्धिदात्री के रूप में स्थित हैं, उन्हें बारंबार नमस्कार।"
नौवें दिन की पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें; कलश और देवी के चित्र के सामने दीपक जलाएँ।
- दिन की पूजा (और यदि रख रहे हैं तो नवरात्रि व्रत) का संकल्प लें।
- ऊपर दिए प्रार्थना श्लोक से उनके स्वरूप का ध्यान करते हुए माँ सिद्धिदात्री का आह्वान करें।
- जल, रोली, अक्षत, लाल फूल या लाल चुनरी, धूप और घी का दीपक अर्पित करें।
- दिन का भोग अर्पित करें: तिल, या कन्या पूजन के साथ हलवा-पूरी-चना।
- नाम मंत्र 108 बार जपें, फिर स्तुति; संभव हो तो दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का एक अध्याय पढ़ें।
- आरती जय अम्बे गौरी से समापन करें और प्रसाद बाँटें।
नवमी के बाद 20 अक्टूबर को विजयादशमी (दशहरा) है।
नौ दिन
सभी नौ रूप माँ दुर्गा पृष्ठ पर देखें, और तिथि व मुहूर्त शारदीय नवरात्रि 2026 में।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नवरात्रि के किस दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा होती है?
नौवें दिन (नवमी); शारदीय नवरात्रि 2026 में यह सोमवार 19 अक्टूबर है।
माँ सिद्धिदात्री का मंत्र क्या है?
नाम मंत्र है ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥, जिसे 108 बार जपा जाता है, साथ में उनका प्रार्थना श्लोक और "या देवी सर्वभूतेषु" स्तुति।
माँ सिद्धिदात्री को क्या भोग लगाएँ?
परंपरा से तिल, या कन्या पूजन के साथ हलवा-पूरी-चना। परिवारों और क्षेत्रों में प्रथाएँ अलग हैं।
सिद्धिदात्री क्या देती हैं?
सिद्धियाँ — आध्यात्मिक शक्तियाँ और सिद्धि — और सबसे बढ़कर आध्यात्मिक लक्ष्य में सफलता।
सिद्धिदात्री का अर्धनारीश्वर से क्या संबंध है?
परंपरा के अनुसार शिव ने उनकी कृपा से सिद्धियाँ पाईं, और उनका आधा शरीर देवी का हो गया — अर्धनारीश्वर रूप।
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