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शारदीय नवरात्र 2026कलश स्थापना मुहूर्त और दिन-प्रतिदिन पूजन की तिथियाँ

ज्योतिषाचार्य हरेन्द्र चौबे द्वारा शारदीय नवरात्र 2026 (11–20 अक्टूबर) का पंचांग: कलश स्थापना का मुहूर्त, किस दिन माँ दुर्गा के किस रूप का पूजन होगा, और महानिशा पूजा, नवमी हवन व दशमी पारण का समय।

शारदीय नवरात्र 2026: कलश स्थापना मुहूर्त और दिन-प्रतिदिन पूजन की तिथियाँ

शारदीय नवरात्र 2026 — एक नज़र में

आश्विन मास का शारदीय नवरात्र — जिसे अधिकांश घरों और पंडालों में धूमधाम से मनाया जाता है — इस वर्ष रविवार, 11 अक्टूबर 2026 (कलश स्थापना) से मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 (विजयादशमी) तक रहेगा। नीचे दी गई तिथियाँ और समय ज्योतिषाचार्य हरेन्द्र चौबे की गणना के अनुसार हैं। मुहूर्त सूर्योदय से निकाले जाते हैं, और सूर्योदय हर शहर में कुछ मिनट आगे-पीछे होता है — इसलिए यदि आप किसी मुहूर्त के बिल्कुल आरंभ या अंत में कलश स्थापना कर रहे हैं, तो अपने स्थानीय पंचांग या कुल-पुरोहित से एक बार अवश्य मिला लें।

प्रथम दिन — कलश स्थापना एवं माता शैलपुत्री पूजन (रविवार, 11 अक्टूबर)

नवरात्र का आरंभ कलश स्थापना से होता है — जल से भरा कलश देवी की उपस्थिति का प्रतीक है, और प्रायः उसके पास मिट्टी में जौ बोए जाते हैं जिनकी नौ दिन तक देखभाल की जाती है। इस दिन पर्वतराज हिमवान की पुत्री माता शैलपुत्री का पूजन होता है, जो नवदुर्गा का पहला स्वरूप हैं।

  • कलश स्थापना: प्रातः 7:03 से सूर्यास्त तक अच्छा है।
  • प्रथम मुहूर्त: प्रातः 6:31 बजे से पूर्वाह्न 11 बजे तक भी श्रेष्ठ है।
  • विशेष अभिजीत मुहूर्त: दिन में 11:35 से 12:23 तक — सर्वोत्तम।

यदि आपके पास केवल एक ही समय चुनने का अवसर हो, तो पंडित जी अभिजीत मुहूर्त को सबसे शुभ बताते हैं।

दूसरे से छठे दिन — देवी के अगले पाँच स्वरूप

  • द्वितीय दिन, सोमवार 12 अक्टूबर: माता ब्रह्मचारिणी — तपस्या में लीन युवा तपस्विनी के रूप में देवी।
  • तृतीय दिन, मंगलवार 13 अक्टूबर: माता चन्द्रघण्टा — जिनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है।
  • चतुर्थी, बुधवार 14 अक्टूबर: माता कुष्मांडा — ब्रह्मांड की सृष्टि करने वाली देवी।
  • पंचमी, गुरुवार 15 अक्टूबर: माता स्कंदमाता — भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता।
  • षष्ठी, शुक्रवार 16 अक्टूबर: माता कात्यायनी — महर्षि कात्यायन के आश्रम में प्रकट हुईं देवी।

षष्ठी की संध्या — बिल्व अभिमंत्रण (16 अक्टूबर)

षष्ठी की संध्या को बेल (बिल्व) वृक्ष की शाखा में देवी का विधिवत आवाहन किया जाता है — इसे बिल्वाभिमंत्रण कहते हैं, और यही अगले दिन देवी की स्थापना की तैयारी है। इस वर्ष 16 अक्टूबर को अपराह्न 2 बजे से सायं 6 बजे तक कभी भी बिल्वाभिमंत्रण पूजन सबके लिए शुभ रहेगा।

महासप्तमी — माता कालरात्रि, नवपत्रिका और पट प्रदर्शन (शनिवार, 17 अक्टूबर)

सप्तमी से पंडालों का मुख्य पूजन आरंभ होता है। भय का नाश करने वाली उग्र स्वरूपा माता कालरात्रि का पूजन होता है, और इसी दिन कई अनुष्ठान साथ होते हैं: डोली यात्रा (देवी को डोली में शोभायात्रा के साथ लाना), नवपत्रिका प्रवेश (नौ दुर्गाओं के प्रतीक नौ पौधों को स्नान कराकर स्थापित करना), मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा, और पट प्रदर्शन — प्रतिमा के आगे का पर्दा खोला जाता है और भक्तों को पहली बार दर्शन मिलते हैं। पट खुलने के बाद दिन भर पूजन चलता रहेगा।

महाअष्टमी — माता महागौरी, कुमारिका पूजन और महानिशा पूजा (रविवार, 18 अक्टूबर)

अष्टमी को महाअष्टमी व्रत, माता महागौरी का पूजन और कुमारिका पूजन होता है, जिसमें छोटी कन्याओं को देवी का साक्षात स्वरूप मानकर पूजा जाता है। रात्रि में महानिशा पूजा होती है — नवरात्र की सबसे गहन साधना, जो गहरी रात में की जाती है। इस वर्ष यह रात्रि 11:00 बजे से 1:30 बजे तक होगी।

महानवमी — दुर्गा नवमी और नवरात्र हवन (सोमवार, 19 अक्टूबर)

नवमी परंपरा से नवदुर्गा के नौवें स्वरूप माता सिद्धिदात्री को समर्पित है, जो साधकों को सिद्धि प्रदान करती हैं। नवमी व्रत पूजन के बाद नवरात्र का हवन 19 अक्टूबर को प्रातः 7 बजे से — दिन भर और रात भर — अगले दिन मंगलवार सुबह 9:40 बजे तक किया जा सकता है, जब तक पूर्णाहुति पूर्ण हो जानी चाहिए।

दशमी — विजयादशमी और व्रत का पारण (मंगलवार, 20 अक्टूबर)

घरों और पंडालों में नवमी की पूजा प्रातः 9:40 बजे तक पूर्ण कर लें। 9:40 के बाद श्रवण नक्षत्र में दशमी के अनुष्ठान होंगे: दशमी पूजन, शमी पूजन, अपराजिता पूजन, जयंती ग्रहण (पहले दिन से कलश के पास उगाए गए जौ के अंकुरों को देवी के आशीर्वाद के रूप में ग्रहण करना), तथा सरस्वती विसर्जन और देवी विसर्जन। इसके बाद नौ दिनों तक व्रत रखने वाले भक्त नवरात्र व्रत का पारण करेंगे।

इस वर्ष के लिए पंडित जी का आशीर्वाद

इस वर्ष रविवार को माता जी का आगमन और मंगलवार को गमन है। पंडित जी की कामना है कि यह सबके लिए उत्तम आयु और आरोग्य, सुख-सौभाग्य, संतति-संतान, अन्न-धन की परिपूर्णता और संपूर्ण प्रसन्नता के साथ सबका मार्ग प्रशस्त करने वाला हो, और आने वाले समय में सबका जीवन सुखमय तथा मंगलमय हो। इस वर्ष का शारदीय नवरात्र माँ के सभी भक्तों के लिए सुखद, शुभद एवं मंगलमय हो।

लेखकHarendra Chaubeyप्रकाशित4 मिनट में पढ़ें

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