Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 9, श्लोक 29

निशुम्भवध

ततो निशुम्भः सम्प्राप्य चेतनामात्तकार्मुकः । आजघान शरैर्देवीं कालीं केसरिणं तथा ॥ २९ ॥

tato niśhumbhaḥ samprāpya chetanāmāttakārmukaḥ ājaghāna śharairdevīṁ kālīṁ kesariṇaṁ tathā

हिंदी अर्थ

इतने में निशुम्भ को चेतना आई और उसने धनुष लेकर बाणों से देवी, काली और सिंह को घायल कर डाला।

भावार्थ

भाई बारी-बारी से लड़ते हैं, एक गिरता है तो दूसरा उठता है।