Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 8, श्लोक 52

रक्तबीजवध

तैश्चासुरासृक्सम्भूतैरसुरैः सकलं जगत् । व्याप्तमासीत्ततो देवा भयमाजग्मुरुत्तमम् ॥ ५२ ॥

taiśhchāsurāsṛiksambhūtairasuraiḥ sakalaṁ jagat vyāptamāsīttato devā bhayamājagmuruttamam

हिंदी अर्थ

उस असुर के रक्त से उत्पन्न असुरों से सारा जगत व्याप्त हो गया, और देवताओं को बड़ा भय हुआ।

भावार्थ

देवता निराश हो जाते हैं। एक नए उपाय की आवश्यकता है।