Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 8, श्लोक 51

रक्तबीजवध

तस्याहतस्य बहुधा शक्तिशूलादिभिर्भुवि । पपात यो वै रक्तौघस्तेनासञ्छतशोऽसुराः ॥ ५१ ॥

tasyāhatasya bahudhā śhaktiśhūlādibhirbhuvi papāta yo vai raktaughastenāsañchhataśho’surāḥ

हिंदी अर्थ

शक्ति, शूल आदि से बार-बार घायल होने पर उसके शरीर से जो रक्त-धारा पृथ्वी पर गिरी, उससे सैकड़ों असुर उत्पन्न हुए।

भावार्थ

केवल बल से यह युद्ध नहीं जीता जा सकता।