Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 8, श्लोक 50

रक्तबीजवध

स चापि गदया दैत्यः सर्वा एवाहनत् पृथक् । मातॄः कोपसमाविष्टो रक्तबीजो महासुरः ॥ ५० ॥

sa chāpi gadayā daityaḥ sarvā evāhanat pṛithak mātṛiīḥ kopasamāviṣhṭo raktabījo mahāsuraḥ

हिंदी अर्थ

और क्रोध से भरे उस महादैत्य रक्तबीज ने भी गदा से सब मातृकाओं पर अलग-अलग प्रहार किया।

भावार्थ

रक्तबीज भी भयंकर प्रतिरोध करता है।