स चापि गदया दैत्यः सर्वा एवाहनत् पृथक् । मातॄः कोपसमाविष्टो रक्तबीजो महासुरः ॥ ५० ॥
sa chāpi gadayā daityaḥ sarvā evāhanat pṛithak mātṛiīḥ kopasamāviṣhṭo raktabījo mahāsuraḥ
हिंदी अर्थ
और क्रोध से भरे उस महादैत्य रक्तबीज ने भी गदा से सब मातृकाओं पर अलग-अलग प्रहार किया।
भावार्थ
रक्तबीज भी भयंकर प्रतिरोध करता है।
