तान् विषण्णान् सुरान् दृष्ट्वा चण्डिका प्राह सत्वरा । उवाच कालीं चामुण्डे विस्तीर्णं वदनं कुरु ॥ ५३ ॥
tān viṣhaṇṇān surān dṛiṣhṭvā chaṇḍikā prāha satvarā uvācha kālīṁ chāmuṇḍe vistīrṇaṁ vadanaṁ kuru
हिंदी अर्थ
देवताओं को उदास देख चण्डिका ने शीघ्रता से काली से कहा: "चामुण्डे! अपना मुख और फैलाओ,
भावार्थ
देवी का उपाय: रक्त को पृथ्वी छूने से पहले ही रोक दो। गीता प्रेस यहाँ "प्राह सत्वरा" पढ़ता है और "विस्तरं" पाठान्तर बताता है।
