Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 8, श्लोक 44

रक्तबीजवध

यावन्तः पतितास्तस्य शरीराद्रक्तबिन्दवः । तावन्तः पुरुषा जातास्तद्वीर्यबलविक्रमाः ॥ ४४ ॥

yāvantaḥ patitāstasya śharīrādraktabindavaḥ tāvantaḥ puruṣhā jātāstadvīryabalavikramāḥ

हिंदी अर्थ

उसके शरीर से रक्त की जितनी बूँदें गिरीं, उतने ही पुरुष उत्पन्न हो गए, जो उसी के समान वीर्य, बल और पराक्रम वाले थे।

भावार्थ

गुणन सटीक है: एक बूँद, एक असुर।