Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 8, श्लोक 45

रक्तबीजवध

ते चापि युयुधुस्तत्र पुरुषा रक्तसम्भवाः । समं मातृभिरत्युग्रशस्त्रपातातिभीषणम् ॥ ४५ ॥

te chāpi yuyudhustatra puruṣhā raktasambhavāḥ samaṁ mātṛibhiratyugraśhastrapātātibhīṣhaṇam

हिंदी अर्थ

और रक्त से उत्पन्न वे पुरुष भी वहाँ मातृकाओं के साथ अत्यंत भयंकर अस्त्र-शस्त्रों के प्रहार से घोर युद्ध करने लगे।

भावार्थ

माताएँ अब ऐसी सेना का सामना कर रही हैं जो हर प्रहार से बढ़ती है।