पुनश्च वज्रपातेन क्षतमस्य शिरो यदा । ववाह रक्तं पुरुषास्ततो जाताः सहस्रशः ॥ ४६ ॥
punaśhcha vajrapātena kṣhatamasya śhiro yadā vavāha raktaṁ puruṣhāstato jātāḥ sahasraśhaḥ
हिंदी अर्थ
फिर जब वज्र के प्रहार से उसका सिर घायल हुआ और रक्त बहा, तो उससे हज़ारों पुरुष उत्पन्न हो गए।
भावार्थ
स्थिति और बिगड़ती है।
