Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 8, श्लोक 34

रक्तबीजवध

माहेश्वरी त्रिशूलेन तथा चक्रेण वैष्णवी । दैत्याञ्जघान कौमारी तथा शक्त्यातिकोपना ॥ ३४ ॥

māheśhvarī triśhūlena tathā chakreṇa vaiṣhṇavī daityāñjaghāna kaumārī tathā śhaktyātikopanā

हिंदी अर्थ

माहेश्वरी ने त्रिशूल से, वैष्णवी ने चक्र से, और अत्यंत क्रोधित कौमारी ने शक्ति से दैत्यों का संहार किया।

भावार्थ

हर एक अपने देवता के विशिष्ट आयुध का प्रयोग करती है।