ऐन्द्रीकुलिशपातेन शतशो दैत्यदानवाः । पेतुर्विदारिताः पृथ्व्यां रुधिरौघप्रवर्षिणः ॥ ३५ ॥
aindrīkuliśhapātena śhataśho daityadānavāḥ peturvidāritāḥ pṛithvyāṁ rudhiraughapravarṣhiṇaḥ
हिंदी अर्थ
ऐन्द्री के वज्रप्रहार से विदीर्ण होकर सैकड़ों दैत्य-दानव रक्त की धाराएँ बहाते हुए पृथ्वी पर गिर पड़े।
भावार्थ
ऐन्द्री का वज्र, इन्द्र के अपने वज्र की तरह।
