Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 8, श्लोक 35

रक्तबीजवध

ऐन्द्रीकुलिशपातेन शतशो दैत्यदानवाः । पेतुर्विदारिताः पृथ्व्यां रुधिरौघप्रवर्षिणः ॥ ३५ ॥

aindrīkuliśhapātena śhataśho daityadānavāḥ peturvidāritāḥ pṛithvyāṁ rudhiraughapravarṣhiṇaḥ

हिंदी अर्थ

ऐन्द्री के वज्रप्रहार से विदीर्ण होकर सैकड़ों दैत्य-दानव रक्त की धाराएँ बहाते हुए पृथ्वी पर गिर पड़े।

भावार्थ

ऐन्द्री का वज्र, इन्द्र के अपने वज्र की तरह।