Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 8, श्लोक 33

रक्तबीजवध

कमण्डलुजलाक्षेपहतवीर्यान् हतौजसः । ब्रह्माणी चाकरोच्छत्रून् येन येन स्म धावति ॥ ३३ ॥

kamaṇḍalujalākṣhepahatavīryān hataujasaḥ brahmāṇī chākarochchhatrūn yena yena sma dhāvati

हिंदी अर्थ

और ब्रह्माणी जिस-जिस ओर दौड़तीं, अपने कमंडलु का जल छिड़ककर शत्रुओं के बल और तेज को नष्ट कर देती थीं।

भावार्थ

हर मातृका अपने ढंग से लड़ती है: ब्रह्माणी शस्त्रों से नहीं, पवित्र जल से।