सा चाह धूम्रजटिलमीशानमपराजिता । दूत त्वं गच्छ भगवन् पार्श्वं शुम्भनिशुम्भयोः ॥ २४ ॥
sā chāha dhūmrajaṭilamīśhānamaparājitā dūta tvaṁ gachchha bhagavan pārśhvaṁ śhumbhaniśhumbhayoḥ
हिंदी अर्थ
उन अपराजिता ने धूमिल जटा वाले ईशान से कहा, "भगवन्! आप दूत बनकर शुम्भ-निशुम्भ के पास जाइए।
भावार्थ
एक उल्लेखनीय उलटफेर: देवी की शक्ति स्वयं शिव को अपना दूत बनाकर भेजती है। सबसे महान देवता भी उनकी सेवा करते हैं।
