Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 8, श्लोक 10

रक्तबीजवध

धनुर्ज्यासिंहघण्टानां नादापूरितदिङ्मुखा । निनादैर्भीषणैः काली जिग्ये विस्तारितानना ॥ १० ॥

dhanurjyāsiṁhaghaṇṭānāṁ nādāpūritadiṅmukhā ninādairbhīṣhaṇaiḥ kālī jigye vistāritānanā

हिंदी अर्थ

धनुष की टंकार, सिंह की दहाड़ और घंटे की ध्वनि से दिशाएँ गूँज उठीं, और काली ने अपना मुख फैलाकर भयंकर गर्जना से विजय पाई।

भावार्थ

काली का फैला हुआ मुख इसी अध्याय में आगे रक्तबीज को हराने की कुंजी बनेगा।