Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 98

देव्या दूतसंवाद

मृत्योरुत्क्रान्तिदा नाम शक्तिरीश त्वया हृता । पाशः सलिलराजस्य भ्रातुस्तव परिग्रहे ॥ ९८ ॥

mṛityorutkrāntidā nāma śhaktirīśha tvayā hṛitā pāśhaḥ salilarājasya bhrātustava parigrahe

हिंदी अर्थ

प्रभो! मृत्यु की उत्क्रान्तिदा नाम की शक्ति आपने छीन ली है, और जलराज वरुण का पाश आपके भाई के अधिकार में है।

भावार्थ

"उत्क्रान्तिदा" (जो प्राणों को निकालती है) स्वयं मृत्यु की शक्ति है। असुरों ने मृत्यु पर शक्ति भी छीन ली है।