Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 97

देव्या दूतसंवाद

छत्रं ते वारुणं गेहे काञ्चनस्रावि तिष्ठति । तथायं स्यन्दनवरो यः पुराऽऽसीत्प्रजापतेः ॥ ९७ ॥

chhatraṁ te vāruṇaṁ gehe kāñchanasrāvi tiṣhṭhati tathāyaṁ syandanavaro yaḥ purā’’sītprajāpateḥ

हिंदी अर्थ

सुवर्ण बरसाने वाला वरुण का छत्र आपके घर में है, और यह श्रेष्ठ रथ जो पहले प्रजापति का था।

भावार्थ

सूची बढ़ती जाती है, हर वस्तु किसी देवता से छीनी हुई।