Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 96

देव्या दूतसंवाद

निधिरेष महापद्मः समानीतो धनेश्वरात् । किञ्जल्किनीं ददौ चाब्धिर्मालामम्लानपङ्कजाम् ॥ ९६ ॥

nidhireṣha mahāpadmaḥ samānīto dhaneśhvarāt kiñjalkinīṁ dadau chābdhirmālāmamlānapaṅkajām

हिंदी अर्थ

यह महापद्म निधि धनपति कुबेर से लाई गई है, और समुद्र ने आपको कभी न मुरझाने वाले कमलों की केसरयुक्त माला दी है।

भावार्थ

"महापद्म" कुबेर की नौ निधियों में से एक है।