Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 91

देव्या दूतसंवाद

नैव तादृक् क्वचिद्रूपं दृष्टं केनचिदुत्तमम् । ज्ञायतां काप्यसौ देवी गृह्यतां चासुरेश्वर ॥ ९१ ॥

naiva tādṛik kvachidrūpaṁ dṛiṣhṭaṁ kenachiduttamam jñāyatāṁ kāpyasau devī gṛihyatāṁ chāsureśhvara

हिंदी अर्थ

ऐसा उत्तम रूप कहीं किसी ने नहीं देखा। असुरेश्वर! पता लगाइए वह देवी कौन है, और उसे ले लीजिए।

भावार्थ

"उसे ले लीजिए": असुरों का दृष्टिकोण हर चीज़ को, दिव्य को भी, संपत्ति मानता है।