स्त्रीरत्नमतिचार्वङ्गी द्योतयन्ती दिशस्त्विषा । सा तु तिष्ठति दैत्येन्द्र तां भवान् द्रष्टुमर्हति ॥ ९२ ॥
strīratnamatichārvaṅgī dyotayantī diśhastviṣhā sā tu tiṣhṭhati daityendra tāṁ bhavān draṣhṭumarhati
हिंदी अर्थ
स्त्रियों में रत्न, अत्यंत सुंदर अंगों वाली, अपनी कांति से दिशाओं को प्रकाशित करती हुई वह अभी वहीं है, दैत्यराज! आप उसे देखें।
भावार्थ
"स्त्रीरत्न" (स्त्रियों में रत्न): "रत्न" शब्द अगले श्लोकों की भूमिका बनाता है, जो शुम्भ द्वारा पहले से छीने गए रत्नों की सूची देते हैं।
