Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 93

देव्या दूतसंवाद

यानि रत्नानि मणयो गजाश्वादीनि वै प्रभो । त्रैलोक्ये तु समस्तानि साम्प्रतं भान्ति ते गृहे ॥ ९३ ॥

yāni ratnāni maṇayo gajāśhvādīni vai prabho trailokye tu samastāni sāmprataṁ bhānti te gṛihe

हिंदी अर्थ

प्रभो! तीनों लोकों में जितने भी रत्न, मणियाँ, हाथी, घोड़े आदि हैं, वे सब इस समय आपके घर में शोभा पाते हैं।

भावार्थ

श्लोक 93–99 शुम्भ के चुराए खज़ानों की सूची देते हैं। यह सूची उसके लोभ के पैमाने को दिखाती है।