स्तोत्रं ममैतत् क्रियते शुम्भदैत्यनिराकृतैः । देवैः समेतैः समरे निशुम्भेन पराजितैः ॥ ८६ ॥
stotraṁ mamaitat kriyate śhumbhadaityanirākṛitaiḥ devaiḥ sametaiḥ samare niśhumbhena parājitaiḥ
हिंदी अर्थ
"शुम्भ दैत्य से तिरस्कृत और युद्ध में निशुम्भ से पराजित होकर यहाँ एकत्र हुए देवता मेरी ही यह स्तुति कर रहे हैं।"
भावार्थ
गीता प्रेस यहाँ "समस्तैः" पाठान्तर बताता है।
