साब्रवीत्तान् सुरान् सुभ्रूर्भवद्भिः स्तूयतेऽत्र का । शरीरकोशतश्चास्याः समुद्भूताब्रवीच्छिवा ॥ ८५ ॥
sābravīttān surān subhrūrbhavadbhiḥ stūyate’tra kā śharīrakośhataśhchāsyāḥ samudbhūtābravīchchhivā
हिंदी अर्थ
सुंदर भौंहों वाली पार्वती ने देवताओं से पूछा, "आप यहाँ किसकी स्तुति कर रहे हैं?" तब उन्हीं के शरीरकोश से प्रकट हुई शिवा देवी बोलीं:
भावार्थ
एक सुंदर मोड़: पार्वती पूछती हैं कि देवता किसकी स्तुति कर रहे हैं, और उत्तर उनके अपने शरीर के भीतर से आता है। जिन देवी को वे ढूँढ रहे हैं, वे पूछने वाली देवी के भीतर ही हैं।
