Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 81

देव्या दूतसंवाद

स्तुता सुरैः पूर्वमभीष्टसंश्रयात्तथा सुरेन्द्रेण दिनेषु सेविता । करोतु सा नः शुभहेतुरीश्वरी शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापदः ॥ ८१ ॥

stutā suraiḥ pūrvamabhīṣhṭasaṁśhrayāttathā surendreṇa dineṣhu sevitā karotu sā naḥ śhubhaheturīśhvarī śhubhāni bhadrāṇyabhihantu chāpadaḥ

हिंदी अर्थ

पूर्वकाल में अपने अभीष्ट की प्राप्ति के लिए देवताओं ने जिनकी स्तुति की, और देवराज इन्द्र ने बहुत दिनों तक जिनका सेवन किया, वे कल्याण की हेतु ईश्वरी हमारा शुभ और मंगल करें तथा आपत्तियों का नाश करें।

भावार्थ

स्तुति एक लंबे छंद में समाप्त होती है, सहायता की प्रार्थना पर लौटते हुए।