Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 41–43

देव्या दूतसंवाद

या देवी सर्वभूतेषु जातिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ४१-४३ ॥

yā devī sarvabhūteṣhu jātirūpeṇa saṁsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

हिंदी अर्थ

जो देवी सब प्राणियों में जाति रूप से स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

भावार्थ

"जाति" का अर्थ है जन्म, प्रजाति या प्रकार। कोई प्राणी जिस भी रूप में जन्म ले, वे उसमें उपस्थित हैं।