या देवी सर्वभूतेषु लज्जारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ४४-४६ ॥
yā devī sarvabhūteṣhu lajjārūpeṇa saṁsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ
हिंदी अर्थ
जो देवी सब प्राणियों में लज्जा रूप से स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, बार-बार नमस्कार।
भावार्थ
"लज्जा", संकोच या स्वस्थ शर्म: वह आंतरिक रोक जो हमें गलत करने से बचाती है।
