Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 47–49

देव्या दूतसंवाद

या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ४७-४९ ॥

yā devī sarvabhūteṣhu śhāntirūpeṇa saṁsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

हिंदी अर्थ

जो देवी सब प्राणियों में शांति रूप से स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

भावार्थ

"शांति": हर आध्यात्मिक मार्ग का लक्ष्य, जो भी उनका ही रूप है।