Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 38–40

देव्या दूतसंवाद

या देवी सर्वभूतेषु क्षान्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ३८-४० ॥

yā devī sarvabhūteṣhu kṣhāntirūpeṇa saṁsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

हिंदी अर्थ

जो देवी सब प्राणियों में क्षान्ति (क्षमा) रूप से स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

भावार्थ

"क्षान्ति", धैर्य और सहनशीलता, गीता के महान गुणों में से एक (13.7, 16.3)।