Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 124

देव्या दूतसंवाद

अन्येषामपि दैत्यानां सर्वे देवा न वै युधि । तिष्ठन्ति सम्मुखे देवि किं पुनः स्त्री त्वमेकिका ॥ १२४ ॥

anyeṣhāmapi daityānāṁ sarve devā na vai yudhi tiṣhṭhanti sammukhe devi kiṁ punaḥ strī tvamekikā

हिंदी अर्थ

हे देवि! सारे देवता युद्ध में अन्य दैत्यों के सामने भी नहीं ठहर सकते, फिर तुम अकेली स्त्री कैसे ठहरोगी?

भावार्थ

"अकेली स्त्री": असुर उन्हें स्त्री होने के कारण कम आँकते हैं। पूरा तीसरा चरित्र इस धारणा को उलट देता है।