अवलिप्तासि मैवं त्वं देवि ब्रूहि ममाग्रतः । त्रैलोक्ये कः पुमांस्तिष्ठेदग्रे शुम्भनिशुम्भयोः ॥ १२३ ॥
avaliptāsi maivaṁ tvaṁ devi brūhi mamāgrataḥ trailokye kaḥ pumāṁstiṣhṭhedagre śhumbhaniśhumbhayoḥ
हिंदी अर्थ
"हे देवि! तुम घमंडी हो, मेरे सामने ऐसी बातें मत करो। तीनों लोकों में कौन पुरुष शुम्भ-निशुम्भ के सामने खड़ा हो सकता है?
भावार्थ
दूत देवी पर घमंड का आरोप लगाता है, जो स्वयं उसके स्वामियों का दोष है।
