Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 111

देव्या दूतसंवाद

यानि चान्यानि देवेषु गन्धर्वेषूरगेषु च । रत्नभूतानि भूतानि तानि मय्येव शोभने ॥ १११ ॥

yāni chānyāni deveṣhu gandharveṣhūrageṣhu cha ratnabhūtāni bhūtāni tāni mayyeva śhobhane

हिंदी अर्थ

हे सुंदरी! देवताओं, गंधर्वों और नागों के पास जो भी अन्य रत्नरूप पदार्थ थे, वे सब मेरे ही पास हैं।

भावार्थ

हर मूल्यवान वस्तु उसकी है, ऐसा वह मानता है।